Voda Idea News: सुप्रीम कोर्ट के बाद सरकार से भी झटका! बकाया मामले में राहत मिलने की उम्मीद नहीं

Voda Idea News: पिछले महीने 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज की एजीआर बकाया पर ब्याज, जुर्माना और ब्याज पर जुर्माना माफ करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो मदद कर सकती है। अब इसे लेकर सामने आ रहा है कि अस्तित्व के संकट से जूझ रही वोडा आइडिया ने सरकार से जो बातचीत शुरू की, उसमें राहत के आसार नहीं हैं

अपडेटेड Jun 03, 2025 पर 10:15 AM
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Voda Idea News: वोडा आइडिया के सीईओ अक्षय मूंदड़ा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी सरकार चाहे तो राहत दे सकती है।

Voda Idea News: एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया भुगतान पर राहत देने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के करीब दो हफ्ते बाद वोडाफोन आइडिया ने सरकार के साथ फिर से बातचीत शुरू की लेकिन कंपनी को यहां से भी झटका लगा। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक एजीआर बकाए के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहत पर विचार संभव नहीं है। वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी वोडा आइडिया के सीईओ अक्षय मूंदड़ा (Akshaya Moondra) ने सरकार से बातचीत फिर शुरू होने का खुलासा एनालिस्ट्स कॉल में की थी। उन्होंने कहा कि राहत को लेकर सरकार से बातचीत शुरू हो गई, यह मिलेगा या नहीं, इस पर कुछ कह नहीं सकते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी सरकार के साथ समाधान खोजने के लिए बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को राहत देने से कोई रोक रहा है, ऐसा नहीं लगता है।

बैंकों के साथ VI की चल रही बातचीत

वोडा आइडिया के सीईओ ने यह भी कहा कि टेलीकॉम कंपनी लॉन्ग टर्म की विस्तार योजनाओं के लिए लोन जुटाने की कोशिश में बैंकों से बातचीत कर रही है, लेकिन बैंक कंपनी के एजीआर बकायों को लेकर अधिक स्पष्टता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। वोडाफोन आइडिया लंबे समय से ₹25,000 करोड़ बैंक फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रही है। कंपनी का कहना है कि हाल ही में उसकी क्रेडिट रेटिंग में सुधार और सरकार की तरफ से ₹36,950 करोड़ के बकाए को इक्विटी में बदलने से बैंकों से बातचीत में मदद मिली है।


क्या है Vodafone Idea का प्लान और क्या आ रही दिक्कतें?

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी ₹5,000–6,000 करोड़ की पूंजी खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर- Capex) की योजना बना रही है ताकि नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके। हालांकि सीईओ का कहना है कि अगले चरण के खर्च की योजना बैंक फंडिंग पर निर्भर करेगी। अब कंपनी के सामने दिक्कतों की बात करें तो 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज की एजीआर बकाया पर ब्याज, जुर्माना और ब्याज पर जुर्माना माफ करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

वोडाफोन आइडिया पर सरकार का ₹83,400 करोड़ का AGR बकाया है और कंपनी ने इसमें से ₹45,000 करोड़ से अधिक की राहत की मांग की थी। हालांकि कंपनी के लिए राहत की बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की लेकिन यह भी कहा कि यदि सरकार चाहे तो हस्तक्षेप कर सकती है। देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया पर करीब ₹2 लाख करोड़ की नियामकीय देनदारियां हैं। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में दायर एक याचिका में कंपनी ने कहा था कि यदि बैंक फंडिंग नहीं मिली तो FY25 के बाद कंपनी संचालन चालू नहीं रख पाएगी।

आईआईएफएल कैपिटल ने 2 जून की रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2026 में ₹16,500 करोड़ का AGR भुगतान आने वाला है, इसलिए AGR राहत और फंड जुटाना वोडाफोन आइडिया के लिए बहुत जरूरी हो गया है। कंपनी मे मई 2023 में 3 वर्षों में ₹50,000–55,000 करोड़ खर्च कर 4G नेटवर्क के विस्तार और 5G सर्विसेज शुरू करने की योजना का ऐलान किया था। कंपनी के सीईओ का कहना है कि FY26 के पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा मौजूदा जून तिमाही में खर्च किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस तिमाही में करीब ₹6,000 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया जाएगा। इस निवेश से 4G कवरेज 84% तक पहुँच जाएगी। 90% कवरेज हासिल करने के लिए बैंक फंडिंग जरूरी होगी। मार्च 2025 के आखिरी तक वोडाफोन आइडिया ने 4G कवरेज 77% से बढ़ाकर 83% कर ली थी। FY25 में कंपनी ने ₹9,570 करोड़ का पूंजीगत खर्च किया था, जो FY24 के ₹1,850 करोड़ की तुलना में काफी अधिक था। जनवरी–मार्च 2025 तिमाही में ₹4,230 करोड़ कैपेक्स हुआ, जो 2018 में वोडाफोन और आइडिया के विलय के बाद सबसे अधिक है। नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ कंपनी खर्चों के नियंत्रण पर भी ध्यान दे रही है। सीईओ ने कहा कि नई साइटें शुरू करने के बावजूद लागत में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई है।

30 मई को एक्सचेंज फाइलिंग में में वोडाफोन आइडिया ने जानकारी भेजी थी कि बोर्ड ने ₹20,000 करोड़ तक की राशि एफपीओ, प्राइवेट प्लेसमेंट या अन्य तरीकों से जुटाने की मंजूरी दे दी है। एक कैपिटल रेजिंग कमेटी उपयुक्त विकल्प का मूल्यांकन करेगी। कंपनी के सीईओ का यह भी कहना है कि टैरिफ में बढ़ोतरी जरूरी है ताकि निवेश पर उचित रिटर्न मिले और टेलीकॉम क्षेत्र में आने वाले समय के निवेश को समर्थन मिले। उनका मानना है कि ऐसा मॉडल होना चाहिए जिसमें अधिक डेटा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अधिक भुगतान करें।

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