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भारत समेत तीन एशियाई देशों पर मुकदमा, लेकिन Waaree Energies और Premier Energies को नहीं लगा झटका

अमेरिका में भारत समेत तीन एशियाई देशों पर मुकदमा हुआ है। इसके चलते घरेलू मार्केट में लिस्टेड वारी एनर्जीज (Waaree Energies) और प्रीमियमर एनर्जीज (Premier Energies) को झटके की आशंका जताई जा रही थी लेकिन इसके विपरीत दोनों के ही शेयर ग्रीन हैं। जानिए कि पूरा मामला क्या है और अमेरिका में याचिकाएं क्यों दायर हुई हैं?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jul 18, 2025 पर 10:00 AM
भारत समेत तीन एशियाई देशों पर मुकदमा, लेकिन Waaree Energies और Premier Energies को नहीं लगा झटका
Stock Market News: अमेरिकी सोलर कंपनियों ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस के खिलाफ नई कारोबारी याचिकाएं दायर की हैं। हालांकि इसका घरेलू स्टॉक मार्केट में सोलर मॉड्यूल बनाने वाली लिस्टेड कंपनियों वारी एनर्जीज (Waaree Energies) और प्रीमियर एनर्जीज (Premier Energies) के शेयरों पर खास दिख नहीं रहा।

Stock Market News: अमेरिकी सोलर कंपनियों ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस के खिलाफ नई कारोबारी याचिकाएं दायर की हैं। हालांकि इसका घरेलू स्टॉक मार्केट में सोलर मॉड्यूल बनाने वाली लिस्टेड कंपनियों वारी एनर्जीज (Waaree Energies) और प्रीमियर एनर्जीज (Premier Energies) के शेयरों पर खास दिख नहीं रहा। दोनों के ही शेयर ग्रीन जोन में हैं। वारी एनर्जीज के शेयर फिलहाल बीएसई पर 1.16% की बढ़त के साथ ₹3244.40 (Waaree Energies Share Price) और वारी एनर्जीज के शेयर 0.13% के उछाल के साथ ₹1080.90 (Premier Energies Share Price) पर हैं। इंट्रा-डे में वारी एनर्जीज के शेयर 1.99% चढ़कर ₹3270.95 और प्रीमियर एनर्जीज के शेयर 1.04% चढ़कर ₹1090.80 पर पहुंच गए थे।

क्या है पूरा मामला?

फर्स्ट सोलर, मिशन सोलर एनर्जी और क्यूसेल्स समेत कई अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड कंपनियों के संगठन अलाएंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड ने नई एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी याचिकाएं दायर की हैं। इनमें आरोप लगाया गया है कि चीन भारत, इंडोनेशिया और लाओस में स्थित फैक्ट्री में बन सस्ते माल से अनुचित रूप से मार्केट को भर रहा है। अमेरिकी सोलर कंपनियों ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस के खिलाफ नई कारोबारी याचिकाएं दायर की हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक वारी एनर्जीज के विदेशी कारोबार का लगभग पूरा हिस्सा अमेरिका से आता है और इसके ऑर्डर बुक का करीब 57% अमेरिका से ही है। मैनेजमेंट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के ओवरऑल बिजनेस में विदेशी कारोबारी की हिस्सेदारी 17-22% रहेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना 2026 तक अपनी अमेरिकी कैपिसिटी को 3.2 गीगावट बढ़ाने की है।

Waaree Energies और Premier Energies का क्या है टारगेट प्राइस?

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