Warren Buffett: 'तीसरा विश्व युद्ध होने पर भी खरीदता रहूंगा स्टॉक्स', वॉरेन बफे क्यों मानते हैं ऐसा
Warren Buffett: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। हालांकि, दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे का कहना है कि बड़े युद्ध के समय भी स्टॉक्स खरीदना समझदारी हो सकती है। जानिए इस सलाह के पीछे क्या वॉरेन बफे का लॉजिक।
वॉरेन बफे के मुताबिक, बड़े युद्ध और संकट अक्सर करेंसी की वैल्यू कमजोर कर देते हैं।
Warren Buffett: अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव ने दुनिया भर के फाइनेंशियल मार्केट को हिला दिया है। शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार दोनों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका में डाउ जोन्स इस महीने यानी मार्च में अब तक 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है।
भारतीय शेयर बाजार भी युद्ध के तनाव से अछूता नहीं। बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स इस महीने करीब 4 प्रतिशत गिर चुका है। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल है। साथ ही, युद्ध के संभावित आर्थिक असर को लेकर बढ़ी चिंता भी।
आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या बड़ा संकट होता है, तो निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की तरफ जाते हैं। जैसे कैश, सोना या सरकारी बॉन्ड। ऐसे समय में लोग जोखिम लेने से बचते हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार में अक्सर भारी बिकवाली देखने को मिलती है।
लेकिन दुनिया के दिग्गज निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफे का मानना है कि डर के ऐसे माहौल में शेयर बाजार से दूर भागना जरूरी नहीं है।
युद्ध के समय भी शेयर खरीदने की सलाह
वॉरेन बफे ने 2014 में CNBC को एक इंटरव्यू दिया था, जिसका वीडियो क्लिप फिर से चर्चा में है। इस इंटरव्यू में बफे से पूछा गया था कि अगर दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो जाए या फिर नया शीत युद्ध छिड़ जाए, तो क्या इससे उनके निवेश फैसलों पर असर पड़ेगा।
बफे का जवाब बिल्कुल साफ था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भी वे शेयर खरीदना जारी रखेंगे। बफे ने कहा कि निवेशकों को आखिरकार अपने पैसे को कहीं न कहीं लगाना ही पड़ता है। लंबे समय तक पैसा खाली नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने इंटरव्यू में कहा था कि इतिहास बताता है कि बड़े युद्ध और संकट अक्सर करेंसी की वैल्यू कमजोर कर देते हैं। युद्ध के दौरान सरकारें भारी खर्च करती हैं। इससे महंगाई बढ़ती है। ऐसे में सिर्फ कैश पकड़े रखना लंबे समय में सुरक्षित रणनीति नहीं रहती। इसका मतलब कि अगर पैसों को होल्ड करके रखेंगे, तो वो महंगाई को बिल्कुल मात नहीं दे पाएगा। उसकी वैल्यू काफी घट सकती है।
कैश के बजाय उत्पादक एसेट्स रखने की सलाह
कैश रखने के बजाय बफे का कहना है कि निवेशकों को ऐसे एसेट्स रखने चाहिए जो समय के साथ वैल्यू पैदा करें और कमाई भी दें। इनमें बिजनेस, खेती की जमीन, रियल एस्टेट या शेयर जैसे एसेट्स शामिल हो सकते हैं।
बफे ने उस इंटरव्यू में कहा था, 'युद्ध के दौरान पैसे को तिजोरी में बंद करके रखना वो आखिरी चीज है, जो आप करना चाहेंगे। आप खेती की जमीन खीरदना चाहेंगे, कोई अपार्टमेंट बिल्डिंग खरीदना चाहेंगे या सिक्योरिटीज यानी शेयर में पैसे लगाना चाहेंगे। जहां उसकी वैल्यू बढ़ती रहे।'
इतिहास भी देता है यही सबक
बफे ने अपने तर्क के समर्थन में इतिहास का उदाहरण भी दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुनिया भर में भारी तबाही हुई थी और अनिश्चितता का माहौल था। इसके बावजूद समय के साथ शेयर बाजार ऊपर गया। इसकी वजह यह थी कि युद्ध के बाद अर्थव्यवस्थाएं धीरे धीरे संभलीं और कंपनियां फिर से बढ़ने लगीं।
बफेट का कहना है कि भू राजनीतिक संकट के दौरान बाजार में छोटे समय के लिए तेज उतार चढ़ाव जरूर आता है। लेकिन लंबे समय में प्रोडक्टिव एसेट्स की दिशा आमतौर पर ऊपर की ओर ही रहती है। दशकों के दौरान बिजनेस बढ़ते हैं, अर्थव्यवस्थाएं नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के साथ आगे बढ़ती हैं और कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ता है। यही चीजें आखिरकार शेयर बाजार को ऊपर ले जाती हैं।
बफे के मुताबिक निवेशकों को खाली पड़े कैश की जगह अर्थव्यवस्था के किसी हिस्से का मालिक बनना चाहिए। लंबे समय में वही एसेट्स ज्यादा मजबूत साबित होते हैं जो असली आर्थिक वैल्यू पैदा करते हैं।
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