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सुस्त प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ का असर कंपनियों के इंटरेस्ट चुकाने की क्षमता पर नहीं पड़ा है, जानिए इसकी वजह

ज्यादातर कंपनियों ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनियों की प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ में कमी देखने को मिली है। लेकिन, इसका असर लोन का इंटरेस्ट चुकाने की उनकी क्षमता पर नहीं पड़ा है। जून तिमाही के मुकाबले तिमाही में उनके इंटरेस्ट कवरेज रेशियो में मामूाली गिरावट आई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 14, 2024 पर 12:22 PM
सुस्त प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ का असर कंपनियों के इंटरेस्ट चुकाने की क्षमता पर नहीं पड़ा है, जानिए इसकी वजह
सितंबर तिमाही में कंपनियों का आईसीआर 4-5 के बीच था, जिसे सुरक्षित माना जाता है।

सितंबर तिमाही में कंपनियों की प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ कमजोर रही है। साथ ही लोन का इंटरेस्ट रेट भी हाई है। लेकिन, इसका असर कंपनियों की कर्ज चुकाने की क्षमता पर नहीं पड़ा है। इससे पहले प्रॉफिट और रेवेन्यू ग्रोथ घटने का असर इंटरेस्ट चुकाने की कंपनियों की क्षमता पर पड़ता था। मनीकंट्रोल के सर्वे से पता चला है कि सितंबर तिमाही में बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों के इंटरेस्ट-कवरेज रेशियो (आईसीआर) में जून तिमाही के मुकाबले मामूली गिरावट आई है। उनका आईसीआर 4-5 के बीच था, जिसे सुरक्षित माना जाता है।

क्या है इंटरेस्ट कवरेज रेशियो?

Interest Coverage Ratio (ICR) से कंपनी के कर्ज का इंटरेस्ट चुकाने की क्षमता का पता चलता है। आईसीआर का मतलब कंपनी के कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट में इंटरेस्ट पर होने वाले खर्च की हिस्सेदारी है। 87 बीएसई मिडकैप कंपनियों का आईसीआर जून तिमाही में 4.96 था। यह सितंबर तिमाही में गिरकर 4.37 फीसदी पर आ गया। 543 बीएसई स्मॉलकैप कंपनियों का आईसीआर जून तिमाही में 4.53 था, जो सितंबर तिमाही में गिरकर 4.32 पर आ गया। उधर, BSE 500 की 344 कपनियों का ICR 7.12 से घटकर 6.48 पर आ गया। यह जानकारी ACE Equities के डेटा पर आधारित है। इस विश्लेषण में बैंक, फाइनेंशियल्स, इंश्योरेंस, ऑयल एंड गैस कंपनियां शामिल नहीं हैं।

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