West Asia Crisis : फंडामेंटल नजरिए से बढ़ते ऊर्जा जोखिमों को देखते हुए ग्लोबल ब्रोकरेज भारतीय इक्विटी को लेकर सतर्क हो गए हैं। नोमुरा ने भारतीय मार्केट को डाउनग्रेड किया है। साल अंत तक बेस केस में निफ्टी के लिए 24,900 का लक्ष्य रखा है। साथ ही,अर्निंग अनुमान भी घटाया है। इसने अर्निंग्स के अनुमान में भी 7.5% की कटौती की है। ब्रोकरेज का कहना है कि क्रूड में तेजी रही तो अर्निंग्स में और 10–15% डाउनसाइड संभव है।
भारतीय मार्केट पर नोमुरा की राय है कि ऑयल प्राइस को लेकर बड़ा खतरा है। ईरान युद्ध के चलते डाउनग्रेडिंग हो सकती है। हाई एनर्जी प्राइस से भारतीय बाजार में रिस्क बढ़ा है। अमेरिका की वापसी के बाद भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने में देरी संभव है। भारतीय मार्केट पर असर पड़ सकता और यह अंडर परफॉर्म कर सकते हैं। हाई एनर्जी प्राइस और AI कैपेक्स शिफ्ट से भारतीय बाजारों को जोखिम है। कमजोर टेक साइकल मोमेंटम से भी चिंता है।
नोमुरा का कहना है कि भारत के डेमोग्राफिक एडवांजेट पर AI का असर देखने को मिल सकता है। कंजम्प्शन आउटलुक पर असर होगा। इससे देश की स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी पर निगेटिव असर होगा। ये चिंताएं बाजार के सेंटिमेंट पर भारी पड़ सकती हैं।
नोमुरा का कहना है कि भारत का डाइवर्सिफायर टैग कमजोर पड़ रहा है। पहले AI टेक गिरावट के लिए हेज के तौर पर देखा जाता था। क्रूड पर निर्भरता की वजह से भारतीय बाजार कम आकर्षक हैं। भारतीय मार्केट में रिटेल/घरेलू फ्लो घटने का खतरा है। मार्केट ने कम रिटर्न से नए निवेशक घट सकते हैं।
नोमुरा की कोरियाई बाजार में निवेश शिफ्ट करने की सलाह है। कोरियाई बाजार में 15 फीसदी करेक्शन इसे आकर्षक बना रहा है। इसका चीन पर ओवरवेट नजरिया है।
दूसरे ग्लोबल ब्रोकरेज ने भी घटाई भारत की रेटिंग
दूसरे ग्लोबल ब्रोकरेज ने भी भारत की रेटिंग घटाई है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि उसके कमोडिटी एनालिस्ट्स ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाले कारोबार में लंबे समय तक रुकावट की संभावना के कारण तेल और गैस की कीमतों के अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं। यह भारत की ऊर्जा संकट के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता को दिखाता है।
ब्रोकरेज ने इससे पहले रिस्क-रिवॉर्ड के कमज़ोर आउटलुक का हवाला देते हुए,12 महीने के निफ्टी टारगेट को 29,300 से घटाकर 25,900 कर दिया था और भारतीय इक्विटीज़ की रेटिंग‘ओवरवेट’से घटाकर‘मार्केटवेट’कर दी थी।
इस बीच, Citi ने भी अपना Nifty टारगेट 28,500 से घटाकर 27,000 कर दिया है। इसका मतलब है कि पिछली क्लोजिंग से करीब 17% की बढ़त की गुंजाइश है, और वैल्यूएशन मल्टीपल्स भी कम हो गए हैं। ब्रोकरेज का अनुमान है कि सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट रहने से भारत की मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। इसमें महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने के साथ करेंट एकाउंट संतुलन गड़बड़ाने का जोखिम शामिल हैं।
भू-राजनीतिक तनाव,तेल की बढ़ती कीमतें और सतर्क वैश्विक संकेतों के हावी रहने से विश्लेषकों का मानना है कि Nifty में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर अहम सपोर्ट लेवल टिक नहीं पाते हैं तो इसके नीचे जाने का जोखिम भी बना रहेगा।
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