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T+1 सेटलमेंट सिस्टम आज से शुरू होगा, जानिए क्या है यह और इसका आपकी ट्रेडिंग पर क्या असर होगा?

शुरुआत में T+1 सेटलमेंट सिस्टम के तहत सिर्फ 100 कंपनियों के शेयर आएंगे, इन कंपनियों का सेलेक्शन मार्केट वैल्यूएशन के आधार पर होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 25, 2022 पर 12:42 PM
T+1 सेटलमेंट सिस्टम आज से शुरू होगा, जानिए क्या है यह और इसका आपकी ट्रेडिंग पर क्या असर होगा?
T+1 settlement system-जानिए क्या है यह सेटलमेंट

what is T+1 settlement system: शेयरों के सेटलमेंट का T+1 सिस्टम (T+1 Settlement System) आज यानी 25 फरवरी से लागू हो रहा है। पहले चरण में इस सिस्टम के दायरे में कुछ शेयर आएंगे। धीरे-धीरे बाकी शेयरों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। यह सिस्टम एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) दोनों ही स्टॉक एक्सचेंजों के शेयर सौदों पर लागू होगा। T+1 सेटलमेंट सिस्टम क्या है, इसका क्या फायदा है, इनवेस्टर्स के लिए इसका क्या मतलब है? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।

सेटलमेंट सिस्टम क्या है?

जब आप शेयर बेचते या खरीदते हैं तो पैसा आपके सेविंग अकाउंट में या शेयर आपके डीमैट अकाउंट में आने में कुछ समय लगता है। यह प्रोसेस एक सिस्टम के जरिए पूरा होता है, जिसे सेटलमेंट सिस्टम कहते हैं। अभी इंडिया में T+2 सेटलमेंट सिस्टम लागू है। इसका मतलब है कि बाय या सेल के ऑर्डर के 2 दिन में शेयरों का सेटलमेंट पूरा होता है। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए आपने सोमवार को कोई शेयर खरीदा है तो बुधवार तक ही आपके डीमैट अकाउंट में आएगा।

करीब 19 साल बाद सेबी सेटलमेंट सिस्टम में बदलाव कर रहा है। इससे पहले अप्रैल 2003 में T+3 सेटलमेंट सिस्टम की जगह T+2 सेटलमेंट सिस्टम लागू किया गया था। इसका मतलब है कि तब शेयर आप तक पहुंचने में तीन दिन का समय लग जाता था। T+1 सेटलमेंट सिस्टम लागू होने के बाद 24 घंटे के अंदर शेयर आपके डीमैट अकाउंट में आ जाएंगे।

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