एनर्जी, फार्मा से डिफेंस तक... ईरान-इजरायल संघर्ष से किन सेक्टर को होगा फायदा, जानिए डिटेल
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में कुछ सेक्टर फायदा उठा सकते हैं, जबकि कुछ निवेशकों को स्थिरता दे सकते हैं। जानिए एनर्जी, गोल्ड, डिफेंस और फार्मा जैसे सेक्टर क्यों चर्चा में हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग थीम लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
गुरुवार, 5 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में बाजार में तेज गिरावट आई थी। लेकिन अब निवेशकों ने गिरावट में खरीदारी शुरू कर दी। एक्सपर्ट का मानना है कि बाजार में युद्ध जैसे हालात के बाद उतार-चढ़ाव अक्सर निवेश के मौके भी पैदा करता है। इतिहास बताता है कि ऐसे समय जो निवेशक घबराते नहीं और सही सेक्टर चुनते हैं, वही लंबी अवधि में फायदा उठाते हैं।
गिरावट के बाद आती है तेज रैली
पिछले 15 सालों का अनुभव बताता है कि भू राजनीतिक घटनाओं के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने कई बार मजबूती दिखाई है। 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के दिन निफ्टी करीब 5% गिर गया था, लेकिन साल के अंत तक बाजार सकारात्मक रिटर्न के साथ बंद हुआ। इसी तरह 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी बाजार पर असर ज्यादा समय तक नहीं रहा और साल के अंत में निफ्टी ने दो अंकों में रिटर्न दिया।
Mahindra Manulife के CIO (Equities) कृष्णा सांघवी का कहना है कि बाजार भू राजनीतिक घटनाओं पर अक्सर तुरंत और तेज प्रतिक्रिया देता है। लेकिन ऐसे हालात धीरे धीरे सामान्य भी हो जाते हैं और रिकवरी भी उतनी ही तेजी से आ सकती है। Shriram Wealth की एक रिपोर्ट भी बताती है कि ऐसे संघर्षों के बाद वैश्विक बाजार आम तौर पर छह महीने के भीतर रिकवर हो जाते हैं।
मौजूदा हालात में कुछ सेक्टर ऐसे हैं जो भू राजनीतिक तनाव के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। आइए पहले उनके बारे में जानते हैं।
तेल महंगा होने से एनर्जी सेक्टर को फायदा
Share.Market के मार्केट एनालिस्ट ओम घावलकर के मुताबिक जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका फायदा सबसे पहले अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को मिलता है, क्योंकि उनकी कमाई बढ़ जाती है।
एनर्जी थीमैटिक फंड्स भी इस ट्रेंड को दिखाते हैं। 3 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार:
एक साल में इन फंड्स का रिटर्न 27% से ज्यादा रहा
साल की शुरुआत से अब तक करीब 3% रिटर्न मिला
पांच साल में लगभग 19% सालाना रिटर्न दिया
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती है। अगर तनाव कम हुआ और तेल सस्ता हुआ तो तेजी भी जल्दी खत्म हो सकती है। इसलिए इस सेक्टर में निवेश करते समय कच्चे तेल की चाल पर नजर रखना जरूरी है।
गोल्ड सुरक्षित निवेश के तौर पर
पिछले 50 सालों के लगभग हर बड़े वैश्विक संघर्ष के दौरान सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है। ऐसे समय निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं।
हालांकि 1 Finance में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (Investment Strategy) सीए यश सेदानी का कहना है कि केवल किसी घटना के आधार पर पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव करना सही रणनीति नहीं है। उनके मुताबिक. सुरक्षित एसेट्स का पोर्टफोलियो में एक स्थान जरूर होना चाहिए, लेकिन केवल अल्पकालिक घटनाओं के कारण निवेश बढ़ाना पोर्टफोलियो का संतुलन बिगाड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग थीम लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स ने तीन साल में लगभग 23% रिटर्न दिया
पांच साल में 20% से ज्यादा रिटर्न मिला
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो कई देश घरेलू निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाते हैं। इससे यह सेक्टर कुछ हद तक मजबूत बने रहते हैं।
डिफेंस सेक्टर को भी मिल रहा सपोर्ट
डिफेंस सेक्टर को सिर्फ भू राजनीतिक तनाव से ही नहीं बल्कि सरकारी नीतियों से भी मजबूत समर्थन मिल रहा है। बजट 2026 में सरकार ने डिफेंस के लिए करीब 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इससे इस सेक्टर की कंपनियों के लिए लंबी अवधि की कमाई की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
पुणे के फाइनेंशियल मेंटर किरण गांधी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च बढ़ने और मजबूत ऑर्डर बुक के कारण भारत में डिफेंस सेक्टर एक मजबूत स्ट्रक्चरल थीम बना हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में कई डिफेंस स्टॉक्स की वैल्यूएशन काफी बढ़ चुकी है। इसलिए निवेश करते समय एंट्री प्राइस पर ध्यान देना जरूरी है।
स्थिरता देने वाले सेक्टर
कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जो बाजार में गिरावट के दौरान पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकते हैं।
फार्मा सेक्टर कुछ सुरक्षित
फार्मा सेक्टर को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
फार्मा फंड्स ने पिछले एक साल में 14% से ज्यादा रिटर्न दिया
पांच साल में 12% से ज्यादा सालाना रिटर्न मिला
ओम घावलकर का कहना है कि आर्थिक सुस्ती के दौरान भी दवाइयों की मांग बनी रहती है, इसलिए यह सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। हालांकि अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, जिससे FMCG कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
टेलीकॉम और यूटिलिटीज सेक्टर
टेलीकॉम सेक्टर को भी कमोबेश स्थिर माना जाता है क्योंकि इसकी मांग मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर आधारित होती है। इसके अलावा पावर और यूटिलिटीज सेक्टर भी स्थिर नकदी प्रवाह के कारण निवेशकों को सहारा दे सकता है। अगर ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं तो कुछ कंपनियों की कमाई भी बढ़ सकती है।
अलग अलग फंड कैटेगरी का प्रदर्शन
हाल के आंकड़े बताते हैं कि अलग अलग सेक्टर में रिटर्न में बड़ा अंतर हो सकता है।
एनर्जी थीमैटिक फंड्स: एक साल में 27% से ज्यादा रिटर्न
इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स: करीब 20% रिटर्न
मैन्युफैक्चरिंग थीम: करीब 24% रिटर्न
टेक्नोलॉजी सेक्टर फंड्स: करीब 19% गिरावट
इसके मुकाबले फ्लेक्सी कैप फंड्स ने पिछले 10 साल में लगभग 14% सालाना रिटर्न दिया है, जो बेहतर डाइवर्सिफिकेशन को दिखाता है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा माहौल में एनर्जी, डिफेंस, गोल्ड और फार्मा जैसे सेक्टर में सोच समझकर और सीमित निवेश किया जा सकता है। लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि भू राजनीतिक तनाव अक्सर अस्थायी होते हैं।
Mahindra Manulife के कृष्णा सांघवी के मुताबिक ऐसे हालात कई बार उम्मीद से भी जल्दी सामान्य हो जाते हैं। इसलिए जो निवेश आज अच्छा लग रहा है, वह परिस्थितियां बदलने पर जोखिम भी बन सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बहुत कम अवधि के निवेशकों के लिए बिजनेस साइकिल फंड एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इनमें फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के हिसाब से अलग अलग सेक्टर में निवेश बदल सकते हैं। ऐसे फंड्स ने पिछले तीन साल में करीब 17% रिटर्न दिया है और अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन दिखाया है।
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