Power Stocks: ये 16 पावर स्टॉक्स दे सकते हैं 60% तक रिटर्न, गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने का होगा फायदा
Power Stocks: गर्मियों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। JM Financial के अनुसार इससे पावर सेक्टर में अवसर बन सकते हैं। ब्रोकरेज ने 16 पावर स्टॉक्स पर नजर रखी है, जिनमें 60 प्रतिशत तक संभावित रिटर्न दिख रहा। चेक करें पूरी लिस्ट।
हाइड्रो पावर भारत की बिजली व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Power Stocks: ब्रोकरेज फर्म JM Financial का मानना है कि भारत का पावर और यूटिलिटीज सेक्टर इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि आने वाली गर्मियों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। ईंधन की उपलब्धता, ऊर्जा की कीमतें और मौसम से जुड़े पैटर्न मिलकर इस साल बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए स्थिति को काफी जटिल बना रहे हैं।
बढ़ रही है बिजली की पीक डिमांड
रिपोर्ट के मुताबिक, दिन के समय बिजली की पीक मांग पहले ही 240-244GW के दायरे में पहुंच चुकी है। वहीं शाम के समय यह मांग 200-215GW तक देखी गई है।
JM Financial का अनुमान है कि गर्मियों के महीनों में यह मांग और तेजी से बढ़ सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, दिन के समय पीक डिमांड 275-285GW तक पहुंच सकती है। शाम के समय यह 260-270GW तक जा सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में देश की बिजली उत्पादन क्षमता पर दबाव और बढ़ सकता है।
गैस वाली बिजली में जोखिम
बिजली की मांग जब ज्यादा बढ़ जाती है, तो गैस वाले प्लांट बिजली उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन फिलहाल यह सेक्टर भी दबाव में है। 4 मार्च 2026 तक भारत ने उद्योगों के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में 10% से 30% तक कटौती कर दी है। कुछ सेक्टर में यह कटौती 40% तक पहुंच गई है। यह स्थिति कतर में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण गैस आपूर्ति में आई बड़ी बाधाओं के बाद बनी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर गैस आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो गर्मियों में गैस आधारित बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। यह खासतौर पर उस समय ज्यादा गंभीर होगा जब दिन और शाम दोनों समय बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।
महंगे तेल का असर कोयले पर भी?
JM Financial का कहना है कि ऊर्जा बाजार में कई चीजें एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। कई उपयोगों में कोयला और तेल एक दूसरे के विकल्प की तरह काम करते हैं।
अगर वैश्विक आपूर्ति में कमी के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो कोयले की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। इसके अलावा क्षेत्रीय मांग और आपूर्ति का संतुलन और इंडोनेशिया सरकार द्वारा संभावित उत्पादन कटौती भी कोयले की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
हाइड्रो पावर पर भी मंडरा रहा खतरा
हाइड्रो पावर भारत की बिजली व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर शाम के समय यह लगभग 25-28GW बिजली उपलब्ध कराता है। लेकिन 2026 में यह सेक्टर भी दबाव में आ सकता है। इसकी वजह यह है कि सर्दियों में हुई बारिश सामान्य से 50% से ज्यादा कम रही है।
हाल के वर्षों में हाइड्रो पावर ने थर्मल बिजली उत्पादन में आई कमी की भरपाई की है। इसी कारण हाइड्रो का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) 2023 में 34% से बढ़कर 2025 में 40% तक पहुंच गया था।
कोयले वाली बिजली पर निर्भरता
अगर गैस और हाइड्रो दोनों पर दबाव बना रहता है, तो शाम की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोयले वाली बिजली उत्पादन को तेजी से बढ़ाना पड़ सकता है।
JM Financial का कहना है कि फिलहाल बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आधारित कंपनियों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
एल नीनो का भी पड़ सकता है असर
ब्रोकरेज ने आने वाले महीनों के लिए चार संभावित स्थितियों का आकलन किया है। इनमें कोयला और गैस की आपूर्ति, कमोडिटी की कीमतें और बिजली की मांग के अलग-अलग स्तरों को ध्यान में रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक मौसम से जुड़े जोखिम भी बने हुए हैं। JM Financial का अनुमान है कि El Nino का असर पड़ने की संभावना लगभग 60% है। अगर ऐसा होता है, तो मौसम पर निर्भर बिजली उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।
पावर सेक्टर के बड़े स्टॉक्स
इस सेक्टर में NTPC, Tata Power, Adani Power और JSW Energy जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं। बदलती परिस्थितियों के बीच बिजली कंपनियों को ईंधन आपूर्ति, मौसम के पैटर्न और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर रखनी होगी। JM Financial के मुताबिक, पावर सेक्टर के स्टॉक्स 60% तक रिटर्न दे सकते हैं।
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