वित्त मंत्री ने बताया, क्यों प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार में की जा रही बिकवाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है। इस सिलसिले में उन्होंने प्रॉफिट बुकिंग की वजहों के बारे में बात की। सीतारमण ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल रहा है और इसी वजह से निवेश प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं

अपडेटेड Feb 17, 2025 पर 11:14 PM
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वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार में आज ऐसा माहौल है, जहां निवेश से काफी बेहतर रिटर्न मिल रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार में की जा रही बिकवाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है। इस सिलसिले में उन्होंने प्रॉफिट बुकिंग की वजहों के बारे में बात की। सीतारमण ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल रहा है और इसी वजह से निवेश प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स उस वक्त भी बाहर निकलते हैं, जब वे प्रॉफिट बुक करने की स्थिति में होते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार में आज ऐसा माहौल है, जहां निवेश से काफी बेहतर रिटर्न मिल रहा है और इस वजह से प्रॉफिट बुकिंग हो रही है। पिछले साल अक्टूबर से फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स 1.56 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। FIIs सिर्फ 2025 में तकरीबन 1 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जिसकी वजह से सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली है। साथ ही, निवेशकों की संपत्तियों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

फाइनेंस सेक्रेटरी तुहीन कान्त पांडे ने कहा कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स एक इमर्जिंग मार्केट से दूसरे इमर्जिंग मार्केट में शिफ्ट नहीं कर रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि ग्लोबल अनिश्चितता वाले मौजूदा समय में निवेश अपने मूल देश में लौटने की इच्छा रखते हैं और ज्यादातर निवेश का मूल देश अमेरिका है। उनका यह भी कहना था कि यह उथल-पुथल अस्थायी है और भारतीय बाजार ऐसे उतार-चढ़ाव को झेलने में सक्षम है।


डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी अजय सेठ ने शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली की वजह से किसी भी तरह के सरकारी हस्तक्षेप की संभावना से इनकार किया। उनका कहना था कि ऐसा कदम तभी उठाया जा सकता है, जब बाजार के असफल होने का कोई प्रमाण हो और फिलहाल ऐसी स्थिति नजर नहीं आती है। सेठ ने कहा कि शेयर बाजार सिर्फ सरकार की नीतियों से संचालित नहीं होते, जबकि अनिश्चितता के समय में विदेशी निवेशक बड़े बाजारों का रुख करते हैं।

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