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'रुपये को फिसलने दे RBI', अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा- $100 से पहले हर हाल में रोकने की जिद सही नहीं

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अरविंद पनगढ़िया ने RBI को रुपये को कृत्रिम रूप से बचाने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि 100 रुपये प्रति डॉलर सिर्फ एक संख्या है और बाजार को स्वाभाविक रूप से काम करने देना चाहिए। ऐसा न करने पर गंभीर झटका लग सकता है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड May 21, 2026 पर 11:10 PM
'रुपये को फिसलने दे RBI', अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा- $100 से पहले हर हाल में रोकने की जिद सही नहीं
पनगढ़िया का मानना है कि रुपये का मूल्य घट जाना हमेशा आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं होता।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसका दबाव कई उभरते देशों की मुद्राओं पर दिख रहा है। इसी बीच अर्थशास्त्री और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सलाह दी है।

उनका कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये के 100 के स्तर को हर हाल में बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पनगढ़िया ने जोर दिया कि RBI को किसी मनोवैज्ञानिक आंकड़े के आधार पर नीति तय करने से बचने की जरूरत है।

'जैसे 99 या 101, वैसे 100'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पनगढ़िया ने कहा कि नीति निर्माताओं को किसी मनोवैज्ञानिक आंकड़े के आधार पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुए वैश्विक झटके के बीच रुपये को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार स्वाभाविक रूप से एडजस्ट होने देना बेहतर होगा।

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