Stock Market Down: भारतीय शेयर बाजार में आज 9 अप्रैल को एक बार फिर बिकवाली का दौर देखने को मिला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 550 अंक तक टूट गया। वहीं निफ्टी लुढ़ककर 22,400 के नीचे चला गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती करने का फैसला भी निवेशकों के मनोबल को नहीं उठा पाया। ग्लोबल स्तर पर टैरिफ को लेकर बढ़ती टेंशन और जीडीपी ग्रोथ में गिरावट के अनुमानों से निवेशक सर्तक दिखे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलान भी आज 9 अप्रैल से लागू हो गए हैं। सबसे अधिक गिरावट आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। इससे पहले मंगलवार को बाजार में तेज उछाल देखने को मिला था, लेकिन आज निवेशकों का मूड पूरी तरह सावधानी भरा रहा।
शेयर बाजार में आज की गिरावट के पीछे 3 बड़ी वजहें रहीं-
1. अमेरिका-चीन के बीच बढ़ता टैरिफ युद्ध
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 104% टैरिफ लगाने का ऐलान करके ग्लोबल मार्केट्स में हड़कंप मचा दिया है। चीन की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार ट्रंप ने जब चीन पर 34% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, तो चीन ने भी अमेरिका पर 34% का जवाबी टैरिफ लगाया था। साथ ही चीन ने इस मामले में "अंत तक लड़ने" की कसम खाई थी। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ युद्ध बिगड़ने की आशंका ने निवेशकों को सहमा दिया है। एक्सपर्ट्स इस टैरिफ वार से ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आने और मंदी आने की आशंका जता रहे हैं, जो बाजार की घबराहट का मुख्य कारण है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, "चाइनीज सामानों पर 104 प्रतिशत का भारी टैक्स लगाने का कदम हैरानी वाला है। इस चीन की तीखी प्रतिक्रिया ग्लोबल मार्केट्स में अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है।" उन्होंने कहा, "शेयर बाजार में खूनखराबा हो रहा है और अनिश्चितता अपने चरम पर है।"
2. RBI की GDP ग्रोथ को लेकर चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। साथ ही RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ट्रंप टैरिफ के भारतीय इकोनॉमी पर पड़ने वाले संभावित असर का भी अनुमान लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारतीय समानों जो 26% का नया टैरिफ लगाया है, उससे भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ में 0.2 फीसदी से लेकर 0.4 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इससे यह 6.7 प्रतिशत के पहले के अनुमान से घटकर लगभग 6.1 प्रतिशत रह जाएगी।
3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल भी शेयर बाजार में गिरावट का एक मुख्य कारण रही। 10-साल की अवधि वाले US ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड 0.20 फीसदी बढ़कर 4.5% और 30-साल की अवधि वाले बॉन्ड पर यील्ड 0.21 फीसदी बढञकर 4.97% तक पहुंच गई। बढ़ती यील्ड का सीधा असर इक्विटी में निवेश पर पड़ता है, जिससे बिकवाली का दबाव बनता है।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा, “Nifty को 22,660 पर जबरदस्त रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा है। अगर ये स्तर पार नहीं होता, तो बाजार 22,300 के आसपास कंसॉलिडेट करेगा। 22,160 के नीचे गिरावट आती है तो वोलैटिलिटी और बढ़ सकती है। हालांकि इसकी संभावना फिलहाल कम है।”
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