Share Market: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, इंट्राडे हाई से 1500 अंक गिरा Sensex, जानें 4 कारण

Why Share Market Falling: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 4 अक्टूबर को कारोबार के दौरान भारी उठापटक देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी ने कारोबार की शुरुआत लाल निशान में की, लेकिन इसके बाद फिर इसमें तेजी आई। सेंसेक्स एक समय 850 अंक तक ऊपर चढ़ गया था। हालांकि कमजोर मार्केट सेंटीमेंट के चलते यह अपनी बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और अपने इंट्राडे हाई से करीब 1500 अंक तक टूट गया

अपडेटेड Oct 04, 2024 पर 6:03 PM
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Why Share Market Falling: सेबी ने रिटेल ट्रेडर्स ने के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के नियम सख्त कर दिए हैं

Why Share Market Falling: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 4 अक्टूबर को कारोबार के दौरान भारी उठापटक देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी ने कारोबार की शुरुआत लाल निशान में की, लेकिन इसके बाद फिर इसमें तेजी आई। सेंसेक्स एक समय 850 अंक तक ऊपर चढ़ गया था। हालांकि कमजोर मार्केट सेंटीमेंट के चलते यह अपनी बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और अपने इंट्राडे हाई से करीब 1500 अंक तक टूट गया। दोपहर 2 बजे के करीब, सेंसेक्स 621.53 अंक या 0.75 फीसदी गिरकर 81,875.57 अंक पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी भी 196.85 अंक या 0.78 फीसदी का गोता लगाकर 25,053.25 पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार की इस उठापटक के पीछे 4 प्रमुख कारण रहे-

1. मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव

भारत सहित पूरी दुनिया के शेयर बाजार इस समय ईरान और इजरायल के बीच बड़े स्तर की युद्ध छिड़ने की आशंका से सहमे हुए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई ने शुक्रवार को 5 सालों के तेहरान के ग्रैंड मस्जिद पहुंच कर जुमे की नमाज पढ़ाई। इस दौरान अपने संबोधन में खामनेई ने सभी मुस्लिम देशों से 'विरोध की पेंटी बांध लेने' की अपील की है। उन्होंने फिलिस्तीन की लड़ाई का समर्थन करते हुए कहा कि हर देश को आक्रमणकारियों के सामने अपनी रक्षा करने का अधिकार है। इस बीच ईरान के विदेशी मंत्री के बेरूत पहुंचने की भी खबर है। दूसरी ओर इजरायल ने बेरूत और वेस्ट बैंक में अपने हवाई हमले जारी रखे हैं, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों के मौत की खबर है।


2. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के नियमों में बदलाव

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने रिटेल ट्रेडर्स को भारी नुकसान से बचाने के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के नियम सख्त कर दिए हैं। इन नियमों में इंडेक्स वायदा में कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाने, वीकली एक्सपायरी पर की संख्या में कमी और मार्जिन बढ़ाने जैसे फैसले शामिल हैं। इसके तहत फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू को 5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है।

3. विदेशी निवेश के बाहर निकलने की चिंता

विदेशी निवेश के भारतीय शेयर बाजार से खिसककर चीन और हांगकांग के बाजारों में जाने की आशंका जताई जा रही है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट, वी के विजयकुमार ने कहा, "पिछले तीन दिनों में एफआईआई ने करीब 30,614 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। FII महंगे वैल्यूएशन वाले भारत की जगह सस्ते वैल्यूएशन वाले हांगकांग में पैसा लगा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि चीन के नए आर्थिक ऐलानों से वहां की इकनॉमिक ग्रोथ तेज होगी और चीनी कंपनियों की आय में सुधार होगा।"

4. सितंबर तिमाही में कमजोर प्रदर्शन

अब तक सितंबर तिमाही को लेकर जिन कंपनियों के कारोबारी अपडेट सामने आए हैं, उनमें से अधिकतर निराशाजनक रहे हैं। डाबर और मैरिको जैसी FMCG कंपनियों ने अपने रेवेन्यू ग्रोथ के कम रहने की जानकारी दी है। ऑटो कंपनियों की बिक्री भी सितंबर में धीमी हुई है। जिसके चलते इनके शेयरों पर दबाव देखा जा रहा है।

आगे बाजार की कैसी रहेगी चाल

वी के विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा FII और DII के बीच चल रही रस्साकशी से तय होगी। उन्हें उम्मीद है कि आगे चलकर बाजार दूसरी तिमाही के नतीजों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देगा, जो अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा।

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