इन 5 कारणों से गिरा शेयर बाजार, सेंसेक्स 375 अंक टूटा, निवेशकों के ₹3 लाख करोड़ डूबे

Why Share Market Falling: भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली देखी जा रही है। सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार 18 अक्टूबर को लगातार चौथे दिन लुढ़क गए। सुबह 10 बजे के करीब, सेंसेक्स 375 गिरकर 80,631 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी भी 114 अंक फिसलकर 24,635 के स्तर पर आ गया था। सबसे अधिक गिरावट FMCG, आईटी और ऑयल एंड गैस शेयरों में देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट में भी जमकर मुनाफावसूली हो रही है

अपडेटेड Oct 18, 2024 पर 10:43 AM
Why share market is falling: विदेशी निवेशक अक्टूबर में अबतक 74,732 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं

Why Share Market Falling: भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली देखी जा रही है। सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार 18 अक्टूबर को लगातार चौथे दिन लुढ़क गए। सुबह 10 बजे के करीब, सेंसेक्स 375 गिरकर 80,631 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी भी 114 अंक फिसलकर 24,635 के स्तर पर आ गया था। सबसे अधिक गिरावट FMCG, आईटी और ऑयल एंड गैस शेयरों में देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट में भी जमकर मुनाफावसूली हो रही है। बीएसई का मिडकैप 0.75 फीसदी, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स 1.25 फीसदी तक टूट गया है। बैंकिंग शेयरों को छोड़ कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। इसके चलते बीएसई के निवेशकों की संपत्ति आज शुरुआती घंटे में करीब 3 लाख करोड़ रुपये घट गई।

शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे 5 प्रमुख कारण है-

1. विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली

विदेशी निवेशकों (FIIs) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिसके चलते बाजार दबाव में बना हुआ है। विदेशी निवेशक अक्टूबर में अबतक करीब 74,732 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। यह पिछले 4.5 सालों में उनकी ओर से किसी एक महीने में की गई अबतक की सबसे अधिक बिकवाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अनिश्चितता, चीन के नए आर्थिक ऐलानों और मिडिल ईस्ट में तनाव सहित ऐसे तमाम फैक्टर्स हैं, जो उन्हें बिकवाली करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।


2. कमजोर तिमाही नतीजे

अभी तक जिन कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आए हैं, उनमें से अधिकतर ने दलाल स्ट्रीट को निराश किया है। खासतौर से बड़ी कंपनियों के नतीजों ने। इसके चलते मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हुआ है और बिकवाली बढ़ी है।

3. भू-राजनीतिक तनाव

भू-राजनीतिक तनावों ने भी बाजार के सेंटीमेंट को हिलाया हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहने के चलते बाजार में आगे कारोबार की दिशा को लेकर अनिश्चचता है। यह अनिश्चितता की यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली का एक कारण बन रही है।

4. बड़े IPOs के चलते लिक्विडिटी की कमी

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि हुंडई मोटर जैसे कुछ बड़े IPO के चलते शेयर बाजार में लिक्विडिटी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कई बड़े संस्थागत निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने की जगह इन IPO में निवेश कर रहे हैं।

5. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद हुई कमजोर

सितंबर महीने के दौरान खुदरा महंगाई दर में तेज उछाल के चलते ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हुई है। सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.5 फीसदी पर पहुंच गई, जो इसका पिछले 9 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पहले अगस्त में यह 3.65 प्रतिशत थी।

टेक्निकल एनालिसिस

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी का लगातार तीन दिन तक 50-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) से नीचे बंद होना आगे और कमजोरी का संकेत देता है। जेम्स का कहना है कि निफ्टी के लिए अगले सपोर्ट लेवल अब 24,300 और 23,900 हो सकता है।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

मार्केट एनालिस्ट्स अम्बरीश बालिगा ने कहा, "विदेशी निवेशकों की ओर बिकवाली अभी कुछ समय तक जारी रह सकती है, खासकर कनाडा-भारत विवाद जैसे भू-राजनीतिक पहलुओं के कारण। हालांकि इसका ट्रेड पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन लंबे समय तक तनाव रहने पर अंतत: इसका असर दिख सकता है।"

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