हेलिओस कैपिटल (Helios Capital) के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने सोमवार (8 जून) को खुलासा किया कि उन्होंने शुक्रवार को बाजार खुलने से ठीक पहले सेमीकंडक्टर स्टॉक्स को ट्रैक करने वाले रखने वाले एक ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड) की यूनिट्स बेच दीं। इसके बाद मार्केट में भारी बिकवाली हुई, खासतौर से जोमैटो (Zomato) की पैरेंट कंपनी एटर्नल (Eternal) के शेयरों में, जिससे कारोबार खत्म होने तक नैस्डैक (Nasdaq) 4% नीचे गिर गया। उन्होंने बताया कि सभी ऑफशोर ईटीएफ लंदन में लिस्टेड हैं और एक दिन पहले ब्रॉडकॉम और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 8% की गिरावट के बाद फैसला ले लिया गया। उन्होंने कहा कि इनमें अधिक गिरावटट की गुंजाइश तो नहीं दिख रही है लेकिन सेमीकंडक्टर्स स्टॉक्स दो महीने में 60-70% ऊपर चढ़ गए जोकि काफी ज्यादा हैं।
मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक समीर अरोड़ा की हेलिओस क्लाइंट्स के ₹1350 करोड़ के पोर्टफोलियो को मैनेज कर रही है। साल 2020 से अब तक BSE500 TRI से 17.7% के रिटर्न की तुलना में इसका सबसे बड़ा पोर्टफोलियो हेलियोस इंडिया राइजिंग पोर्टफोलियो सालाना 16.9% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ा है। इसके अलावा फर्म की म्यूचूअल फंड यूनिट अलग से अपने ग्राहकों के ₹1 हजार करोड़ मैनेज कर रही है।
बड़ी टेक कंपनियों पर बेयरेश होने की वजह?
इस समय स्पेसएक्स (SpaceX), एंथ्रॉपिक (Anthropic) और ओपनएआई (OpenAI) के आईपीओ को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। इन तीनों कंपनियों की कुल मिलाकर $3 ट्रिलियन से अधिक के वैल्यूएशन पर $20 करोड़ जुटाने की है। हालांकि समीर अरोड़ा का कहना है कि यहां यह ध्यान देने की जरूरत है कि कोई भी कंपनी बिना किसी और से हिस्सा छीने शून्य से $2 ट्रिलियन तक नहीं पहुंचती, इसके लिए किसी न किसी को $2 ट्रिलियन यानी $2 लाख करोड़ का मार्केट कैप गंवाना पड़ता है। उन्होंने एक उदाहरण से इसे समझाया कि एपल (Apple) का मार्केट कैप असामान्य रूप से बड़ा है क्योंकि उसने कई पुरानी कंपनियों जैसे सन माइक्रोसिस्टम्स (Sun Microsystems), फूजित्सू (Fujitsu) और एचपी (HP) के हिस्से का बाजार अपने पास खींच लिया।
समीर अरोड़ा के मुताबिक निवेशकों को बाजार के हर रुझान में हिस्सा लेने की बजाय ब्रोडर स्ट्रक्चरल थीम पर फोकस करना चाहिए। उनका मानना है कि साल में सिर्फ एक ट्रेड ही काफी है। फिलहाल वह डिफेंस, क्विक कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लेकर बुलिश हैं। उनका मानना है कि ग्राहकों की दिलचस्पी में बदलाव आ रहा है, जिससे नई कारोबारी मॉडल वाली कंपनियां ट्रेडिशनल और अनऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं।
अप्रैल की शुरुआत में पश्चिमी एशिया में पहले युद्धविराम के ऐलान के बाद उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए एटर्नल और एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाई थी। अब भी वह एटर्नल को लेकर पॉजिटिव हैं लेकिन बैंकिंग सेक्टर को लेकर उनका रुझान पहले जैसा नहीं है। इसी तरह पावर इक्विपमेंट कंपनियां पहले हेलिओस कैपिटल की पसंदीदा निवेश थीम में शामिल थीं, लेकिन समीर को अब ये उतनी आकर्षक नहीं लग रही हैं और इसकी मुख्य वजह इन शेयरों में हालिया समय में आई तेज उछाल है।
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