फार्मा कंपनी वोकहार्ट ने कांग्रेस की तरफ से लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि वोकहार्ट की सहयोगी कंपनी कैरोल इंफो सर्विस ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को किराए के रूप में बड़ी रकम चुकाई है। वोकहार्ट ने यह भी कहा है कि उसके खिलाफ चल रही सेबी की जांच से इस मामले का कोई संबंध नहीं है। फार्मा कंपनी ने 6 सितंबर को रेगुलेटरी फाइलिंग में अपनी सफाई पेश की।
कंपनी ने आरोप को बेबुनियाद बताया
Wockhardt ने कहा, "हम पूरी तरह से इन आरोपों को खारिज करते हैं। हम यह भी साफ कर देना चाहते हैं कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं।" कंपनी ने कहा कि उसने सभी कानूनों का पालन किया है और हर कानून का पूरा ध्यान रखती है।
काग्रेस ने लगाया था यह आरोप
6 सितंबर को कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के हेड पवन खेड़ा ने Wockhardt पर ये आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि माधबी पुरी बुच 2018 से 2024 के बीच पहले सेबी की होल-टाइम सदस्य और बाद में चेयरपर्सन रही हैं। इस दौरान उन्होंने कैरोल इंफो सर्विसेज से किराए के रूप में 2.16 करोड़ रुपये लिए हैं। यह कंपनी वोकहार्ट से जुड़ी है। बुच 2018 में सेबी का होल-टाइम सदस्य बनी थीं। उसके बाद उन्होंने अपनी एक प्रॉपर्टी किराए पर दी थी। 2018-19 के दौरान उन्हें इससे 7 लाख रुपये किराया मिला था। 2019-20 में उन्हें इससे 36 लाख किराया मिला, जो इस साल बढ़कर 46 लाख रुपये हो गया।
वोकहार्ट के खिलाफ सेबी की चल रही जांच
उधर, खेड़ा ने कहा, "बुच ने जिस कंपनी को अपनी पॉपर्टी किराया पर दिया, उसका नाम कैरोल इंफो सर्विस है, जो वोकहार्ट का हिस्सा है। वोकहार्ट वही कंपनी है, जिसके खिलाफ आरोपों की जांच लगातार सेबी कर रहा है।" वोकहार्ट के खिलाफ सेबी कई मामलों की जांच कर रहा है। इनमें 2023 के दौरान इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला भी शामिल है। खेड़ा ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाए।
कांग्रेस के इन आरोपों के बाद वोकहार्ट के शेयरों में 6 सितंबर को बड़ी गिरावट दिखी। शेयर 5 फीसदी गिरकर 1,034 रुपये पर बंद हुए थे। बीते एक साल में इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस दौरान इसने 306 फीसदी रिटर्न दिया है।