Women's day special : होम मेकर से लेकर वेल्थ-क्रिएटर तक, रसोई से लेकर रॉकेट तक हर जगह महिलाएं सफलता की नई कहानी गढ़ रही हैं। आज वो देश की इकोनॉमी का रास्ता तय कर रही हैं। महिलाएं लीडरशिप का नया चेहरा हैं। इक्विटी मार्केट में भी इनका दबदबा है। नारी शक्ति मार्केट में भी धमाल मचा रही है। देश की नारियों का निवेश अब सिर्फ सोना और बैंक FD तक सीमित नहीं है। महिलाएं इक्विटी और MF में भी बढ़ चढ़कर निवेश कर रही हैं। देश में हर 4 में से 1 डीमैट अकाउंट महिलाओं के नाम खुल रहा है।
इक्विटी मार्केट में महिलाओं की संख्या 5 साल में 2.5 गुना बढ़ी है और बाजार में इनकी हिस्सेदारी 25 फीसदी हो गई है। दिसंबर 2025 तक NSE के कुल निवेशक 12.5 करोड़ थे। इनमें महिलाओं की संख्या 3.1 करोड़ थी। 2023 में बाजार में महिलाओं की भागीदारी में 22.8 फीसदी की बढ़त हुई। वहीं, 2024 में बाजार में इनकी भागीदारी में 24.1 फीसदी और 2025 में 24.8 फीसदी की बढ़त हुई।
देश के करीब आधे राज्यों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी नेशनल औसत से ज्यादा
देश के करीब 50% राज्यों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी नेशनल औसत से ज्यादा है। गोवा में महिला निवेशकों की हिस्सेदार 33% है। वहीं, मिजोरम में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी 32.5%, चंडीगढ़ में 32.4%, सिक्किम में 31.4%, महाराष्ट्र में 29% और गुजरात में 28% है। बता दें कि महिला निवेशकों की हिस्सेदारी नेशनल औसत 25% है।
नारी: होममेकर से वेल्थ क्रिएटर तक
महिलाएं होममेकर से वेल्थ क्रिएटर तक हैं। MF इंडस्ट्री में 45–50 महिला फंड मैनेजर हैं। कई महिलाएं 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के AUM वाले फंड संभाल रही हैं। इंडिविजुल निवेश AUM का लगभग 33% महिलाओं के नाम है।
वूमेन स्टार्टअप, सफलता का स्टैंडअप
देश में महिला को-फाउंडेड स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ी है। भारत में हर 100 रुपए स्टार्टअप फंडिंग में से 4 रुपए महिला स्टार्टअप्स को हो रही है। कई बड़े फंड का वूमेन फंड प्रोग्राम है। देश में 7000 से ज्यादा वूमेन स्टार्टअप है जो कुल स्टार्टअप का 7.5 फीसदी हैं। वूमेन स्टार्टअप ने बाजार से 1.1 अरब डॉलर जुटाए हैं।