Yes Bank AT1 Bonds: प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को लेकर विवाद फिर बढ़ गया है। बैंक ने इन बॉन्ड को बहाल करने में देरी पर Axis Trustee Services के आरोपों को खारिज कर दिया है। वहीं, ट्रस्टी ने बैंक को तीन दिन का समय दिया है। उसने चेतावनी दी है कि तय समय में बॉन्ड बहाल नहीं हुए, तो वह बैंक के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगा।
Axis Trustee ने तीन दिन में बॉन्ड बहाल करने को कहा
Axis Trustee Services ने 28 अक्टूबर को Yes Bank को पत्र लिखा था। इसमें बैंक से तीन दिन के भीतर ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड बहाल करने और इससे जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा गया था।
इसके जवाब में Yes Bank ने 30 अक्टूबर को शेयर बाजार को बताया कि उसने ट्रस्टी के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बातचीत की है। बैंक ने Axis Trustee को भेजे जवाब में कहा कि वह जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के आरोप को स्वीकार नहीं करता।
बैंक का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझ रहा है। साथ ही, उसके असर और पालन के तरीकों की जांच कर रहा है।
क्या होते हैं AT-1 बॉन्ड?
AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं। बैंक इन बॉन्ड के जरिए निवेशकों से पैसा लेते हैं और बदले में उन्हें ब्याज देते हैं। हालांकि, ये सामान्य बॉन्ड से अलग होते हैं। बैंक की वित्तीय हालत बिगड़ने पर इन बॉन्ड को पूरी तरह या आंशिक रूप से राइट-ऑफ किया जा सकता है। यानी निवेशकों का पैसा डूब भी सकता है।
Yes Bank ने 24 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा था कि AT-1 बॉन्ड की शर्तों के तहत उसके पास कूपन यानी ब्याज भुगतान को लेकर फैसला लेने का अधिकार है।
मार्च 2020 में बॉन्ड राइट-ऑफ का फैसला
यह पूरा विवाद मार्च 2020 में शुरू हुआ था। उस समय Yes Bank के प्रशासक ने बैंक के पुनर्गठन के दौरान ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करने का फैसला लिया था। आसान भाषा में कहें तो इन बॉन्ड में निवेश करने वालों का पैसा खत्म कर दिया गया था।
Axis Trustee Services ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। जनवरी 2023 में हाई कोर्ट ने बॉन्ड राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया। इसके बाद Yes Bank, RBI और केंद्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी निवेशकों के पक्ष में दिया फैसला
15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने Yes Bank, RBI और केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद बॉन्ड बहाल करने का मुद्दा फिर सामने आया।
अब Axis Trustee चाहता है कि बैंक जल्द से जल्द बॉन्ड बहाल करे। वहीं, Yes Bank का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने के लिए जरूरी कदमों की जांच कर रहा है। ऐसे में अब देखना होगा कि यस बैंक तीन दिन की समयसीमा में क्या कदम उठाता है।
यस बैंक का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.81% की गिरावट के साथ 15.15 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले एक महीने में स्टॉक 26.99% टूटा है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसी बॉन्ड में सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जो यस बैंक के खिलाफ आया है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।