Zerodha Nithin Kamath: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन और भारत समेत ज्यादातर देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है। इसका ग्लोबल इकोनॉमी पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा। दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट आई है। भारतीय शेयर बाजार भी लगातार लाल निशान में खुल रहे हैं। इसे कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं ने और भी प्रभावित किया है।
अब इस मामले पर Zerodha के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने भारतीय शेयर बाजार के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर बड़ा चेतावनी दी है। उनका कहना है कि स्टॉक मार्केट की यह गिरावट निवेशकों को बुरी तरह तोड़ सकती है और वो कई साल के लिए बाजार से दूरी बना सकते हैं।
रिटेल इन्वेस्टर्स का बाजार से क्यों टूट रहा भरोसा?
कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 2008 से 2014 के बीच इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड योजनाओं में नेट इनफ्लो में तेज गिरावट आई थी। उन्होंने लिखा, 'पिछले पांच साल में एक हैरान कर देने वाली बात यह रही है कि रिटेल इन्वेस्टर लगातार शेयर बाजार में खरीदार बने रहे हैं। लेकिन अब गिरावट के दौरान वे खरीदारी जारी रखेंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी गिरावटें निवेशकों को वर्षों के लिए बाजार से बाहर कर सकती हैं, जैसा कि 2008 के बाद हुआ था। दरअसल, अमेरिका में 2008 में लेमन ब्रदर्स के दिवालिया होने से वैश्विक आर्थिक मंदी आ गई थी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा और विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में पूंजी बाजार से निकाल ली थी। जनवरी 2008 में सेंसेक्स 1,408 अंक यानी 7.4 प्रतिशत गिरा था। अगले कुछ महीनों में यह 60 प्रतिशत तक नीचे आ गया।
शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट की वजह
शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव है। अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर भारी 104 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। पहले यह 54 प्रतिशत थी। लेकिन, इस पर जवाबी एक्शन लेते हुए चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगा दी थी। फिर ट्रंप ने 50 प्रतिशत की अतिरिक्त टैरिफ लगाई। जवाब में चीन ने अमेरिका पर फिर 84 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है।
इन सबका असर भारत पर भी पड़ा है। भारतीय रुपया कमजोर हो गया है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे गिरकर 86.26 पर पहुंच गया है, जो लगभग तीन महीनों में रुपया की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है। हालांकि, आरबीआई ने 9 अप्रैल को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इससे उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में डिमांड बढ़ेगी, जिससे शेयर बाजार में भी मजबूती आएगी।