'AI का ढिंढोरा पीटना बंद करो!' जेरोधा सीईओ नितिन कामथ ने बताया निवेशकों को लुभाने का असली सीक्रेट

Zerodha Nithin Kamath: नितिन कामथ ने अपनी पोस्ट में बेहद चुटीले और कड़े शब्दों में फाउंडर्स की इस आदत की तुलना रोजमर्रा की सामान्य दिनचर्या से कर दी। उन्होंने लिखा, 'यह दावा करना कि आपका प्रोडक्ट AI का इस्तेमाल करता है, बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप यह ढिंढोरा पीटें कि आप हर दिन नहाते हैं! यह कोई ऐसी खासियत नहीं है जो आपको दूसरों से अलग बनाती है'

अपडेटेड Aug 16, 2026 पर 12:18 PM
नितिन कामथ ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और फाउंडर्स को एक बड़ी चेतावनी दी है

Zerodha Nithin Kamath on AI Pitch Decks: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल आज हर जगह हो रहा है, लेकिन अगर कोई स्टार्टअप फाउंडर यह सोचकर निवेशकों से पैसा मांगने जा रहा है कि उसका प्रोडक्ट 'AI-पावर्ड' है, तो वह बहुत बड़ी गलतफहमी में है। देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा के सह-संस्थापक और सीईओ नितिन कामथ ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और फाउंडर्स को एक बड़ी चेतावनी दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए नितिन कामथ ने साफ कहा कि पिच डेक में 'हम AI का इस्तेमाल करते हैं' लिखना अब कोई अनोखी बात या खासियत नहीं रह गई है। अगर फाउंडर्स अब भी इसी लाइन के सहारे निवेशकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वे अपनी फंडिंग की संभावनाओं को खुद खत्म कर रहे हैं।

'रोज नहाने का दावा करने जैसा है AI का ढिंढोरा पीटना'


नितिन कामथ ने अपनी पोस्ट में बेहद चुटीले और कड़े शब्दों में फाउंडर्स की इस आदत की तुलना रोजमर्रा की सामान्य दिनचर्या से कर दी। उन्होंने लिखा, 'यह दावा करना कि आपका प्रोडक्ट AI का इस्तेमाल करता है, बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप यह ढिंढोरा पीटें कि आप हर दिन नहाते हैं! यह कोई ऐसी खासियत नहीं है जो आपको दूसरों से अलग बनाती है।'

कामत का मानना है कि आज के दौर में AI तकनीक किसी भी बिजनेस के लिए 'टेबल स्टेक्स' यानी एक बुनियादी जरूरत बन चुकी है। जैसे किसी भी कंपनी में इंटरनेट या कंप्यूटर होना कोई अनोखी बात नहीं, ठीक वैसे ही अब हर टेक कंपनी से AI इस्तेमाल करने की उम्मीद पहले से ही की जाती है।

'ऐसे पिच डेक देखकर अब ध्यान देना बंद कर दिया है'

जेरोधा प्रमुख ने खुलासा किया कि उनके पास रोज ढेरों स्टार्टअप्स के प्रपोजल आते हैं, और उनमें से ज्यादातर की शुरुआत इसी बात से होती है कि वे AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि हर दूसरी पिच में 'We use AI' देखकर वे इतने परेशान हो चुके हैं कि अब वे ऐसे प्रपोजल्स पर ध्यान देना लगभग बंद कर चुके हैं।

फाउंडर्स को लगता है कि AI का नाम लेने से वे बहुत इनोवेटिव दिखेंगे, लेकिन वास्तव में इसका उल्टा असर हो रहा है। निवेशक ऐसे घिसे-पिटे दावों को देखकर तुरंत बोर हो जाते हैं।

AI ने सुंदर प्रेजेंटेशन बनाना तो आसान किया, लेकिन यूनिक होना मुश्किल

नितिन कामथ ने एक और अहम पहलू की ओर इशारा किया। आज AI टूल्स की मदद से कोई भी स्टार्टअप फाउंडर बेहद सुंदर, अट्रैक्टिव और पॉलिश्ड पिच डेक आसानी से तैयार कर लेता है। लेकिन इसका नुकसान यह हो रहा है कि सभी फाउंडर्स एक ही जैसे टूल्स और बजवर्ड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जब हर कोई एक ही टेक्नोलॉजी और एक जैसी भाषा का इस्तेमाल करेगा, तो भीड़ में आपका स्टार्टअप अलग कैसे नजर आएगा? सिर्फ अच्छे दिखने वाले AI जनरेटेड प्रेजेंटेशन से फंड नहीं मिलेगा, बल्कि बिजनेस का आइडिया और उसकी बुनियाद असली होनी चाहिए।

निवेशकों को अब किस बात की तलाश है?

नितिन कामथ ने सलाह दी कि फाउंडर्स को अपनी पिचिंग की रणनीति में तुरंत बदलाव करना चाहिए। टेक्नोलॉजी का नाम जपने के बजाय उन्हें इन असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए:

मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स: कंपनी असल में मुनाफा कैसे कमाएगी और उसका बिजनेस मॉडल कितना मजबूत है।

मार्केट का बड़ा मौका: जिस समस्या को स्टार्टअप हल कर रहा है, उसका बाजार कितना बड़ा है।

असली इनोवेशन: क्या प्रोडक्ट में वास्तव में कुछ नया है या सिर्फ AI का लेबल चिपकाया गया है।

बजवर्ड्स छोड़िए, असली बिजनेस पर ध्यान दीजिए

नितिन कामथ का यह बयान उन सभी युवा उद्यमियों के लिए एक बड़ी सीख है जो केवल AI जैसे ट्रेंडिंग शब्दों के सहारे अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं। अगर आप निवेशक के पास जा रहे हैं, तो यह मत बताइए कि आप AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि यह समझाइए कि आपका प्रोडक्ट ग्राहक की किस बड़ी समस्या का समाधान कर रहा है।

डिस्क्लेमर: यह स्टोरी जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए विचारों और बयानों पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह न माना जाए।

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