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20 नवंबर के बाद फीस स्ट्रक्चर में बदलाव कर सकती है जेरोधा: नितिन कामत

ऑनलाइन ब्रोकरेज फर्म जेरोधा के CEO नितिन कामत ने ऐलान किया है कि कंपनी 20 नवंबर 2024 के बाद अपने फीस स्ट्रक्चर की समीक्षा करेगी। यह समीक्षा इंडेक्स डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए सेबी के नए नियमों के असर के बाद की जाएगी। कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा, ' हम बिजनेस पर नियमों के असर के बाद प्राइस स्ट्रक्चर में अपने बदलाव को लेकर फैसला करेंगे'

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 04, 2024 पर 4:00 PM
20 नवंबर के बाद फीस स्ट्रक्चर में बदलाव कर सकती है जेरोधा: नितिन कामत
इस बदलाव से फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेड के 60% और जेरोधा के कुल ऑर्डर के 30% हिस्से पर असर पड़ सकता है।

ऑनलाइन ब्रोकरेज फर्म जेरोधा के CEO नितिन कामत ने ऐलान किया है कि कंपनी 20 नवंबर 2024 के बाद अपने फीस स्ट्रक्चर की समीक्षा करेगी। यह समीक्षा इंडेक्स डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए सेबी के नए नियमों के असर के बाद की जाएगी। कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा, ' हम बिजनेस पर नियमों के असर के बाद प्राइस स्ट्रक्चर में अपने बदलाव को लेकर फैसला करेंगे।'

उनका यह भी कहना था कि इस बदलाव से फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेड के 60% और जेरोधा के कुल ऑर्डर के 30 हिस्से पर असर पड़ सकता है। सेबी के नए रेगुलेशंस का मकसद रिटेल इनवेस्टर्स की सुरक्षा करना और इंडेक्स डेरिवेटिव सेगमेंट में फ्यूचर एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग के रेगुलेशन के साथ बाजार में और स्थिरता सुनिश्चित करना है।

सेबी ने जो अहम बदलाव किए हैं, उनमें हर एक्सचेंज में वीकली एक्सपायरी को एक तक सीमित करना और कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना शामिल हैं। नतीजतन, इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज 5-10 लाख रुपये से बढ़कर 15-20 लाख रुपये हो जाएगा। एक्सचेंजों को 20 नवंबर से सिर्फ एक बेंचमार्क इंडेक्स में वीकली एक्सपायरी की अनुमति होगी।

उदाहरण के तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के पास निफ्टी 50 (Nifty 50) या बैंक निफ्टी में से कोई एक विकल्प चुनने का अधिकार होगा, न कि दोनों। बाकी सभी सूचकांक मंथली एक्सपायरी की तरफ शिफ्ट हो जाएंगे। इसके अलावा, फरवरी 2025 से ट्रेडर्स को उन कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े कैलेंडर स्प्रेड पर मार्जिन नहीं मिलेगा, जो एक्सपायरी वाले दिन ही एक्सपायर हो रहे हैं।

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