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सोशल मीडिया पर ब्रांड प्रमोशन कर रहे हैं तो आप पर है रेगुलेटर की नजर

काउंसिल एक ऐसी गाइडलाइंस बना रही है जिससे खरीदार उसमें दी गई सूचना के मुताबिक फैसला ले सके
अपडेटेड Oct 10, 2019 पर 09:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इन दिनों सोशल साइट्स जैसे Facebook, YouTube, Twitter और Instagram में लोग ब्रांड का प्रचार करते हैं। कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके कई फॉलोअर्स होते हैं, वो भी ब्रांड का प्रचार करते हुए दिख जाएंगे। ब्रांडेड फोन से लेकर कपड़े और भी तमाम चीजों को लोग पोस्ट करते रहते हैं। ऐसे में आम आदमी यही सोचता है कि ये प्रोडक्ट बेहतर है। लेकिन आपको याद रखना होगा कि हो सकता है कि ब्रांड के बारे में पोस्ट डालने वाले को उस कंपनी से पैसे मिलते हों। यानी यह ब्रांड को प्रमोशन करने का एक प्रकार का प्रचार हो सकता है। अब इस पर ऐडवर्टाइजिंग रेग्युलेटर (विज्ञापन नियमक) ने ध्यान देना शुरु कर दिया है।


Advertising Standards Council of India (ASCI) के टॉप ऑफिसर के मुताबिक, इंटरनेट पर अपने प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के मकसद से काम करने वालों के लिए एक नई गाइडलाइंस बनाने की तैयारी चल रही है। जो कि इस साल के तीसरी तिमाही तक आ सकती है। काउंसिल एक ऐसी गाइडलाइंस बना रही है जिससे खरीदार उसमें दी गई सूचना के मुताबिक फैसला ले सके।


Sony Pictures Networks के प्रेसीडेंट रोहित गुप्ता को हाल ही में ASCI का चेयरमैन चुना गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल विज्ञापन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसलिए इसके लिए बेहतर नियम बनाने की जरूरत है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोगों के लिए एक गाइडलाइंस की सख्त जरूरत है।  


बता दें कि Instagram, Twitter और Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग ब्रांड और प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रहे हैं। जो कि ASCI के दायरे में आता है। गुप्ता ने एक इंटरव्यू में कहा कि इन्फ्लूएंसर्स बड़े होते जा रहे हैं और अब हमें redressal System और गाइडलाइंस पर ध्यान देने की जरूरत है। जिससे कंज्यूमर सुरक्षित रूप से ब्रांड़ों का उपयोग कर सकें।


एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर विशिष्ट क्षेत्र में अपनी विश्वसनीयता बनाने के बाद इन पोस्ट के जरिए प्रोडक्ट के खरीद के निर्णय को प्रभावित करते हैं। इस कैटगरी में सेलिब्रिटी और इंडिपेंडेंट कंटेट क्रिएटर दोनों शामिल होते हैं। जो लोग ब्रांड के प्रमोशन के तौर पर पोस्ट करते हैं, उन्हें अपने फॉलेअर काउंट और यूजर एंगेज्मेंट के आधार पर पे (भुगतान)  किया जाता है। ब्यूटी, फैशन, ट्रैवेल और फूड जैसे प्रोडक्ट में कुछ ज्यादा पोस्ट दिखाई देती हैं।
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक, ASCI के पास ऐसे दंड देने का कोई पॉवर नहीं है। उधर कंज्यूमर प्रोजेक्शन एक्ट जो कि लगभग किसी भी माध्यम के भ्रामक विज्ञापन हों, उसे दंडित करना चाहता है। ASCI को सेल्फ रेग्युलेटरी इंडस्ट्री के रूप में मान्यता दी गई है।


डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी AdLift के मुताबिक, 1.75 करोड़ डॉलर के ग्लोबल मार्केट  मुकाबले भारत का मार्केट 75-150 लाख डॉलर इन्फ्लूएंसर प्रभावित करते हैं। ऑनलाइन मार्केर्टिक के नजरिए से ये एक बड़ी रकम है। साथ ही ये उम्मीद की जा रही है कि सस्ते डाटा और अफर्डेबल स्मार्ट फोन के जरिए अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन जाएं।
AdLift के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव प्रशांत पुरी ने कहा कि निश्चित रूप से ये गाइडलाइंस कंज्यूमर, ब्रांडों और बड़े पैमाने पर विज्ञापन सिस्टम के लिए समय की जरूरत है। आज कई इन्फ्लूएंसर मार्केटिंग को प्रभावित कर रहे हैं।   


इंडिया के बड़े इन्फ्लूएंसर्स में प्राजक्ता कोली (उर्फ मोस्टलीसेन), सेजल कुमार, निखिल शर्मा(मुंबईकर निखिल), मासूम मिनवाला मेहता, भुवन बम हैं। प्लेटफॉर्म पर इनके लाखों फॉलोअर्स हैं। ये लोग Vivo, Jack & Jones India, Olay, Beardo, Emirates airlines, Spotify, Mivi और Nike जैसे ब्रांड़ों के बढ़ावा देते हैं।


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