ITR Filing 2025: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना हर टैक्सपेयर्स की जिम्मेदारी है। लेकिन, इसमें की गई छोटी-सी गलती भी नोटिस, जुर्माना या स्क्रूटनी का कारण बन सकती है। अगर आप सही समय पर और बिना गलती के ITR भरना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें।
1. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करना
हर टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म निर्धारित है, जो उनकी इनकम सोर्स, नौकरी, बिजनेस या निवेश के आधार पर तय होता है। अगर आप गलत फॉर्म भरते हैं, तो आपकी फाइलिंग अमान्य हो सकती है और दोबारा फाइल करना पड़ सकता है। इससे न सिर्फ परेशानी होती है बल्कि टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस आने का भी खतरा बढ़ जाता है।
2. सेविंग अकाउंट और FD पर ब्याज
बैंकों से मिलने वाला ब्याज भी टैक्सेबल इनकम में आता है, चाहे वह सेविंग अकाउंट से हो या फिक्स्ड डिपॉजिट से। अक्सर लोग यह छोटी सी इनकम रिपोर्ट करना भूल जाते हैं, जो आयकर विभाग की नजर में बड़ी चूक मानी जाती है। AIS रिपोर्ट में यह जानकारी पहले से होती है, इसलिए छुपाने पर पेनल्टी लग सकती है।
3. फॉर्म 26AS और AIS से मिलान न करना
ITR भरने से पहले यह जरूरी है कि आप अपनी इनकम और TDS की जानकारी को फॉर्म 26AS और AIS से क्रॉसचेक करें। अगर इसमें अंतर होता है और आपने गलत इनकम दिखाई है, तो टैक्स डिपार्टमेंट आपकी रिटर्न को फ्लैग कर सकता है। यह एक आम गलती है जिससे बचने के लिए फाइलिंग से पहले सभी आंकड़े ठीक से मिलाना जरूरी है।
4. छूट और कटौतियों का गलत क्लेम करना
इनकम टैक्स की धारा 80C, 80D, और अन्य सेक्शन में कटौती तभी क्लेम करें जब आपके पास वैध दस्तावेज और रसीदें हों। गलत क्लेम करने पर ITR प्रोसेस के दौरान कटौती खारिज की जा सकती है, जिससे आपकी टैक्स लायबिलिटी बढ़ जाएगी। इसके अलावा झूठे क्लेम करने पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।
5. केवल फॉर्म 16 पर निर्भर रहना
फॉर्म 16 सैलरीड क्लास के लिए एक जरूरी डॉक्यूमेंट है, लेकिन इसमें कई बार ब्याज, किराया या अन्य इनकम शामिल नहीं होती। सिर्फ इस पर भरोसा करके ITR भरना अधूरी जानकारी के आधार पर फाइल करने जैसा है। इसलिए खुद से सभी इनकम सोर्स कंफर्म कर फाइनल फिगर डालना बेहद जरूरी है।
6. ITR वेरिफाई करना भूल जाना
ITR फाइल करना सिर्फ आधा काम है, जब तक आप उसे ई-वेरिफाई नहीं करते, तब तक उसे स्वीकार नहीं किया जाता। ई-वेरिफिकेशन के बिना आपका रिटर्न अधूरा माना जाएगा और यह स्वीकृत नहीं होगा। फाइलिंग के 30 दिन के भीतर वेरिफिकेशन जरूरी है, वरना आपको दोबारा रिटर्न भरना पड़ सकता है।