अलगाववादी नेता और उदारवादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) को करीब 19 महीने बाद गुरुवार को नजरबंदी से रिहा कर दिया गया है। वे इतने समय से जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर स्थित अपने घर में ही कैद में थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बयान में कहा कि मीरवाइज उमर फारूक की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध को गुरुवार को हटा लिया। अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद अगस्त 2019 से उन्हें नजरबंद कर दिया गया था।

हुर्रियत के अध्यक्ष के एक करीबी सहयोगी ने पीटीआई को बताया कि पुलिस ने मीरवाइज को सूचित किया है कि अब उनकी आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं है और वह शुक्रवार को जामिया मस्जिद जाने के लिए आजाद हैं। हालांकि प्रशासन ने मीरवाइज के सहयोगी के दावों की ना तो पुष्टि की ना ही उसका खंडन किया। बताया जा रहा है कि नजरबंदी से रिहाई के बाद मीरवाइज शुक्रवार को श्रीनगर शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में जुम्मे की जमात को संबोधित करेंगे। मीरवाइज उमर को अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने से एक दिन पहले 4 अगस्त, 2019 को घर में नजरबंद कर दिया गया था।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर से न केवल अनुच्छेद 370 हटाया गया, बल्कि राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में भी बांट दिया गया। मीरवाइज कश्मीर के मुख्य मौलवी भी हैं। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद मीरवाइज समेत सैकड़ों नेताओं, कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया था या हिरासत में रखा गया था। अधिकतर नेताओं को पिछले साल मार्च में रिहा कर दिया गया था, लेकिन मीरवाइज समेत कुछ नेताओं पर पाबंदी खत्म नहीं की गई थी।

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