हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने राज्य में 75 फीसदी लोकल रिजर्वेशन को सही बताते हुए कहा है कि इस तरह का रिजर्वेशन लागू करने वाला हरियाणा पहला राज्य नहीं है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में चौटाला ने कहा, "IT सेक्टर में काम करने वाले ज्यादातर लोग हरियाणा के ही हैं।" 75 फीसदी लोकल रिजर्वेशन के ऐलान के बाद कंपनियों ने यह चिंता जताई थी कि उन्हें काम करने लायक लोग नहीं मिल पाएंगे।
चौटाला जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता हैं। हरियाणा में BJP ने JJP के सहयोग से सरकार बनाई है।
2 मार्च को राज्य सरकार ने हरियाणा स्टेट एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट्स बिल पास किया था। इसके तहत स्थानीय नौकरियों में 75 फीसदी लोकल रिजर्वेशन का नियम लागू कर दिया गया है। हालांकि यह नियम सिर्फ उन्हीं नौकरियों के लिए है जहां मंथली सैलरी 50,000 रुपए से कम है।
हालांकि सरकार के इस कदम की मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव जैसे इंडस्ट्री लीडर्स कड़ी आलोचना की थी। भार्गव ने कहा है कि राज्य सरकार ने गलत दिशा में फैसला किया है।
लोक नीति विशेषज्ञ "थिंक टैंक" सेंटर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक पॉलिसी (CIPP) के CEO और वरिष्ठ पत्रकार यतीश राजावत ने बात करते हुए चौटाला ने कहा, अगर भार्गव जी ऐसा कह रहे हैं तो मैं उनको भी याद करवा देता हूं कि जब ये पॉलिसी एक कानून के तौर पर लागू हो रही थी तो उस विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वो भी बैठे थे। हमने उनके भी सुझाव लिए। 50 हजार रुपए मासिक वेतन तक की नौकरियों में ही आरक्षण का सुझाव उन्हीं की ओर से आया है।"
इससे पहले हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने मनीकंट्रोल को बताया था कि यह रिजर्वेशन सिर्फ नॉन-टेक्निकल नौकरियों के लिए है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "हरियाणा में 75 फीसदी रिजर्वेशन सिर्फ उन्हीं नौकरियों में होगी जहां सैलरी 50,000 रुपए से कम होगी। यह भी सिर्फ नॉन-टेक्निकल जॉब्स में। टेक्निकल नौकरियों में कोई रिजर्वेशन लागू नहीं है।"
खट्टर ने यह भी कहा था कि लेबर इंसपेक्टर कंपनियों को परेशान नहीं करेंगे। रिजर्वेशन के बारे में इंडस्ट्री को सिर्फ सेल्फ डिक्लेयरेशन देना होगा कि वह नियम के मुताबिक काम कर रही हैं और यह मान लिया जाएगा।
चौटाला ने राज्य की अहमियत बताते हुए कहा कि 8 बड़ी IT कंपनियां हरियाणा में निवेश करना चाहती है। उन्होंने कहा, "मारुति ने भी प्लांट लगाने के लिए चर्चा की है। हम उन्हें खरखोदा में जमीन देने को तैयार हैं। अगर वह एकमुश्त पेमेंट करती हैं तो हम रिज़र्व कीमत से 10 प्रतिशत कम पर भी जमीन देने को तैयार हैं। एमेजॉन भी खरखोदा में जमीन तलाश रही है।"
चौटाला की पार्टी JJP हालांकि अभी कृषि कानून के मामले में आलोचनाओं से घिरी हुई है। किसानों का दबाव सरकार के कामकाज पर पड़ रहा है। चौटाला ने कहा, इन मुश्किलों के बावजूद हम बहुत काम कर रहे हैं।