Economy of England: इंग्लैंड की इकोनॉमी मंदी (Recession) में जा सकती है। इंग्लैंड के केंद्रीय बैंक Bank of England ने यह अनुमान जताया है। दरअसल, ब्रिटेन भी उन देशों में शामिल हैं, जहां इनफ्लेशन कई सालों की उंचाई पर पहुंच गया है। महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंकों के पास इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का सीधा असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड ने इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। यह 1989 के बाद से इंटरेस्ट रेट में एक बार में सबसे ज्यादा वृद्धि है। इसके बाद उसने खुद कहा है कि इन कदमों से देश की इकोनॉमी मंदी में जा सकती है। यह मंदी 2024 के मध्य तक बनी रह सकती है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर Andrew Bailey ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आगे का रास्ता बहुत कठिन है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद एनर्जी की कीमतों में उछाल आया है। इसने पूरे देश की हालत खराब कर दी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इंग्लैंड की इकोनॉमी के लिए हालात काफी चैलेंजिंग हैं।
एक तरह जहां ब्रिटेन की इकोनॉमी गंभीर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रही है, वही देश में राजनीतिक हालात भी अस्थिर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ब्रिटेन ने तीन प्रधानमंत्रियों की सरकार देखी है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक अभी ब्रिटने के प्रधानमंत्री हैं। कंजरवेटिव पार्टी की नेता लिज ट्रस के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देने के बाद सुनक को पार्टी ने प्रधानमंत्री चुना है।
उधर, अमेरिकी इकोनॉमी पर भी मंदी का खतरा मंडरा रहा है। 2 नवंबर को फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बार इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की है। खास बात यह है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि आगे भी इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला जारी रखेगा। इसका सीधा असर अमेरिकी इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ रहा है।
3 नवंबर को बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा कि वह इंटरेस्ट रेट को 0.75 फीसदी बढ़ा रहा है। इससे ब्रिटेन में इंटरेस्ट रेट बढ़कर 3 फीसदी हो गया है। यह 2008 की फाइनेंशियस क्राइसिस के बाद से सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट है। दरअसल, इंग्लैंड में इनफ्लेशन बढ़कर करीब 11 फीसदी पर पहुंच गया है। यह बीते चार दशक में सबसे ज्यादा है।