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क्या चीन के लिए मुसीबत बन गई भारी नकदी? कंपनियों और पब्लिक को कर्ज लेने के लिए मना रहे हैं बैंक

घरों की बिक्री लगातार घटना मॉर्टगेज की डिमांड घटने के संकेत हैं और रियल एस्टेट कंपनियों के बीच क्रेडिट की मांग कमजोर बनी हुई है। क्लाइंट्स की कमी के चलते बैंक आपस में बिलों की अदलाबदली कर रहे हैं, जिससे कॉर्पोरेट लेंडिंग के लिए रेगुलेटरी शर्तों को पूरा कर सकें

MoneyControl Newsअपडेटेड May 31, 2022 पर 11:44 AM
क्या चीन के लिए मुसीबत बन गई भारी नकदी? कंपनियों और पब्लिक को कर्ज लेने के लिए मना रहे हैं बैंक
चीन में कोविड महामारी और लॉकडाउन के चलते कंपनियों और परिवारों का भरोसा इतना कमजोर हो गया है कि वहां पर कोई कर्ज लेने को तैयार नहीं है

Chinese Banks Cash Crisis : वैसे तो ज्यादा कैश होना बैंकों और कंपनियों के लिए अच्छी बात है। लेकिन चीन सरकार के लिए, इन दिनों यही बात एक बड़ी मुसीबत हो गई है। दरअसल, कोविड महामारी और लॉकडाउन के चलते कंपनियों और परिवारों का भरोसा इतना कमजोर हो गया है कि वहां पर कोई कर्ज लेने को तैयार नहीं है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में लोन ग्रोथ (loan growth) लगभग पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है और कई इंडीकेटर्स से संकेत मिल रहे हैं कि मई में भी हालात में सुधार की उम्मीद नहीं है। घरों की बिक्री लगातार घटना मॉर्टगेज की डिमांड घटने के संकेत हैं और रियल एस्टेट कंपनियों के बीच क्रेडिट की मांग कमजोर बनी हुई है। क्लाइंट्स की कमी के चलते बैंक आपस में बिलों की अदलाबदली कर रहे हैं, जिससे कॉर्पोरेट लेंडिंग के लिए रेगुलेटरी शर्तों को पूरा कर सकें।

इन वजहों से कम है क्रेडिट डिमांड

कर्ज लेने के प्रति बेरुखी की मुख्य वजह चीन की कोविड बंदिशों के प्रति अनिश्चितता है। साथ ही लोगों के मन में यह आशंका भी बनी हुई है कि भविष्य में महामारी के चलते फिर से लॉकडाउन लग सकते हैं। वहीं उत्पादन ठप हैं और छंटनी जारी है। रेवेन्यू घट चुका है और प्रॉफिट लगातार कम हो रहा है। कई कंपनियों ने एक्सपैंशन प्लान पर रोक लगा दी है।

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