SEBI ने सख्त किए IPO में बोली लगाने के नियम, 1 सितंबर से लागू होंगे New IPO Rules, जानिए आपके लिए क्या बदलेगा

IPO bidding new rules: अब सिर्फ सब्सक्रिप्शन डेटा (IPO Subscription) बढ़ाने के लिए आईपीओ में बोली लगाने के प्रैक्टिस पर रोक लग जाएगी। इसका मतलब है कि सिर्फ वही इनवेस्टर्स इश्यू में बोली लगा सकेंगे, जो कंपनी के शेयर वास्तव में खरीदना चाहते हैं

अपडेटेड May 31, 2022 पर 1:02 PM
1 सितंबर से लॉन्च होने वाले सभी पब्लिक इश्यू को नए नियम का पालन करना होगा।

SEBI ने IPO में बोली लगाने के नियमों को सख्त बना दिया है। उसने सोमवार को इसका ऐलान किया। अब सिर्फ सब्सक्रिप्शन डेटा (IPO Subscription) बढ़ाने के लिए आईपीओ में बोली लगाने के प्रैक्टिस पर रोक लग जाएगी। इसका मतलब है कि सिर्फ वही इनवेस्टर्स इश्यू में बोली लगा सकेंगे, जो कंपनी के शेयर वास्तव में खरीदना चाहते हैं। नए नियम 1 सितंबर से लागू होंगे।

सेबी को पता चला था कि कुछ संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) और अमीर निवेशक (High Net Worth Individuals) सिर्फ आईपीओ का सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के लिए उसमें बोली लगा रहे थे। उनका मकसद इश्यू के जरिए शेयरों में इनवेस्ट करना नहीं था।

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मार्केट रेगुलेटर ने सोमवार को इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि आईपीओ के अप्लिकेशन को तभी प्रोसेस किया जाएगा, जब उसके लिए जरूरी फंड इनवेस्टर्स के बैंक अकाउंट में उपलब्ध होगा। सर्कुलर के मुताबिक, "स्टॉक एक्सचेंज अपने इलेक्ट्रॉनिक बुक बिल्डिंग प्लेटफॉर्म पर तभी ASBA अप्लिकेशन को स्वीकार करेंगे, जब उसके साथ अप्लिकेशन मनी ब्लॉक होने का कनफर्मेशन होगा।"

सेबी ने कहा है कि यह रूल सभी कैटेगरी के इनवेस्टर्स पर लागू होगा। आईपीओ में बोली लगाने के लिए रिटेल, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) जैसी कैटेगरी बनाई गई हैं। 1 सितंबर से लॉन्च होने वाले सभी पब्लिक इश्यू को नए नियम का पालन करना होगा। अभी, सभी कैटेगरी के इनवेस्टर्स के फंड ASBA के आधार पर ब्लॉक किया जाता है। लेकिन, व्यवहार में QIB और NII कैटेगरी के इनवेस्टर्स को कुछ छूट हासिल है।

सेबी को जानकारी मिली थी कि हाल में आए कुछ आईपीओ में कुछ खास अप्लिकेशंस इसलिए कैंसिल करने पड़े, क्योंकि बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स के बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे नहीं थे। अभी आईपीओ में बिडिंग ASBA फ्रेमवर्क के जरिए की जाती है। इसमें इनवेस्टर्स को शेयर अलॉट होने के बाद ही उसके बैंक अकाउंट से पैसे निकलते हैं।

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