Chinese Scholar Wang Zhen ने कहा, इंडिया की स्वतंत्र विदेश नीति की वजह से चीन के लोग उसका सम्मान करते हैं

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को लेकर चीन की नीति स्पष्ट नहीं होने के बारे में पूछने पर Zhen ने कहा कि आंतकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर चीन की पॉलिसी बहुत पॉजिटिव है। हाल के सालों में चीन और इंडिया ने आतंकवाद विरोधी कई संयुक्त अभ्यास किए हैं

अपडेटेड Oct 12, 2022 पर 4:00 PM
झेन ने इंडिया-पाकिस्तान रिश्ते के बारे में कहा कि उम्मीद है कि दोनों देश आपसी मतभेदों को दूर करेंगे। इनमें आतंकवाद का मसला भी शामिल है।

अमेरिका चीन की कंपनियों को दबाने की कोशिश कर रहा है। वह चीन में बने उत्पादों पर ज्यादा टैरिफ लगाकर उनके आयात को घटाना चाहता है। यह कहना है Wang Zhen का। झेन चीन के शंघाई एकैडमी ऑफ सोशल साइंसेज (SASA) के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइना स्टडीज में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के डायरेक्टर हैं। उन्होंने प्रणय शर्मा से बातचीत में चीन सरकार की विदेश नीति, CCP Congress की अगली बैठक और अमेरिका के साथ चीन के टकराव सहित कई मसलों पर खुलकर चर्चा की।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के तीसरी बार सीसीपी का जनरल सेक्रेटरी बनने की संभावनाओं के बारे में Zhen ने कहा कि इसका फैसला सीसीपी की 20वें नेशनल कांग्रेस में होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बाद भी चीन की घरेलू और विदेश नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं आएगा। अगर जिनपिंग फिर से सीपीपी का जनरल सेक्रेटरी बनते हैं तो उनके तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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उन्होंने कहा कि चीन के नेताओं के लिए आर्थिक विकास और लोगों के जीविकोपार्जन के स्तर में सुधार पहली प्राथमिकता बने रहेंगे। इसलिए चीन सामाजिक और आर्थिक सुधार को जारी रखेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिशें भी जारी रहेंगी। जहां तक विदेश नीति की बात है तो चीन दूसरे देशों के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश करता रहेगा ताकि इससे दोनों को फायदा हो।

अमेरिका के साथ चल रही तनातनी के बारे में झेन ने कहा कि अमेरिका जिस तरह के कदम उठा रहा है, वे आपसी रिश्तों के लिए ठीक नहीं हैं। अमेरिका ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे फ्री ट्रेड और मार्केट इकोनॉमी के वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के सिद्धातों का उल्लंघन किया है। अमेरिका सरकार वैश्विक आर्थिक सहयोग और वैश्वीकरण के भी खिलाफ हैं।

यह पूछने पर कि क्या अमेरिका ताइवान के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करेगा, उन्होंने कहा कि इस बारे में बताना मुश्किल है। ताइवान को लेकर चीन का रुख एक जैसा रहा है। ताइवान चीन का एक हिस्सा है। यूएन रिजॉल्यूशंस 2758 के मुताबिक, चीन की सरकार संयुक्त राष्ट्र में चीन की एकमात्र प्रतिनिधि है। चीन के साथ कूटनीतिक संबंध रखने वाले देशों को इस बारे में पता है। वे इसे स्वीकार भी करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को लेकर चीन की नीति स्पष्ट नहीं होने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि आंतकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर चीन की पॉलिसी बहुत पॉजिटिव है। हाल के सालों में चीन और इंडिया ने आतंकवाद विरोधी कई संयुक्त अभ्यास किए हैं। जहां तक लश्कर-ए-तोएबा और जैश-ए-मोहम्मद की बात है तो इंडिया को दोनों संगठनों के खिलाफ ज्यादा सबूत पेश करने होंगे। इसके बाद ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिलाया जा सकता है कि इनके खिलाफ लगाए जानेवाले आरोप सही हैं।

झेन ने इंडिया-पाकिस्तान रिश्ते के बारे में कहा कि उम्मीद है कि दोनों देश आपसी मतभेदों को दूर करेंगे। इनमें आतंकवाद का मसला भी शामिल है। उन्हें आपसी भरोसे और आत्मविश्वास के साथ इन मसलों को हल करना होगा। इससे इस पूरे इलाके को भी फायदा होगा। चीन यही चाहता है। उन्होंने कि इंडिया दुनिया की बड़ी शक्ति है। गुट-निरपेक्ष आंदोलन में इंडिया की बड़ी भूमिका रही है। चीन और इंडिया दोनों की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। इंडिया की स्वतंत्र विदेश नीति की वजह से चीन के लोग इंडिया का सम्मान करते हैं। दोनों देश हिमालय के दोनों तरफ हजारों साल से रहते आ रहे हैं।

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