'लीथियम नहीं मिलेगा, बैट्री बनाना हो तो यहां आ जाओ', जिम्बाब्वे का बड़ा फैसला, लेकिन चीन की कंपनियों को इस कारण मिली राहत

दुनिया में सबसे अधिक गोल्ड की स्मगलिंग होती है। इसके अलावा इस लिस्ट में लीथियम भी शुमार है जो अब नया गोल्ड बनता जा रहा है। जिम्बाब्वे के पास इसका विशाल भंडार है लेकिन इसे वहां से ला नहीं सकते। वहां की सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और इस रोक से चीन की कुछ कंपनियों को राहत क्यों दी गई है, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

अपडेटेड Dec 24, 2022 पर 4:06 PM
लीथियम का इस्तेमाल हाई एनर्जी-डेनसिटी रिचार्जेबल बैट्रीज बनाने में होता है। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के 2021 के आंकड़ों के मुताबिक जिम्बाब्वे का 60 फीसदी निर्यात मिनरल्स का है और जीडीपी में माइनिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16 फीसदी है।

दुनिया भर में सबसे अधिक स्मगलिंग गोल्ड की होती है। इसके अलावा सबसे अधिक स्मगलिंग होने वाले मिनरल्स में लीथियम भी शामिल है जिसे अब नया गोल्ड माना जा रहा है। जिम्बाब्वे के पास लीथियम की 20 फीसदी वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता है। हालांकि इस हफ्ते की शुरुआत में वहां की सरकार ने माइन से लीथियम के निर्यात पर रोक लगा दिया। जिम्बाब्वे सरकार का कहना है कि इसके निर्यात से उसे अरबों का नुकसान हो रहा है जिसे अब नहीं होने दिया जाएगा। अब लीथियम के निर्यात की बजाय इसके इस्तेमाल से जिम्बाब्वे में ही बैट्री बनाना होगा। हालांकि इस सख्ती से चीन की कुछ कंपनियों को राहत दी गई है।

लीथियम के निर्यात पर क्यों लगी रोक

जिम्बाब्वे सरकार का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका और यूएई को वैध-अवैध तरीके से लीथियम भेजे जाने से उसे 180 करोड़ डॉलर के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। इस समय जिम्बाब्वे पर भारी कर्ज लदा हुआ और इकोनॉमिक कंडीशन भी अच्छी नहीं है। जिम्बाब्वे के पास लीथियम की वैश्विक मांग के 20 फीसदी के बराबर लीथियम उत्पादन की क्षमता है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के विस्तार के चलते आने वाले समय में इसकी मांग बेतहाशा बढ़ने वाली है। इसका भाव तेजी से बढ़ रहा है और पिछले साल की तुलना में यह 180 फीसदी से अधिक ऊपर चढ़ चुका है।


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इसके अवैध कारोबार से जिम्बाब्वे को 1200 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ जबकि इस देश पर 1370 करोड़ डॉलर का विदेशी कर्ज है। लीथियम का इस्तेमाल हाई एनर्जी-डेनसिटी रिचार्जेबल बैट्रीज बनाने में होता है। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के 2021 के आंकड़ों के मुताबिक जिम्बाब्वे का 60 फीसदी निर्यात मिनरल्स का है और जीडीपी में माइनिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16 फीसदी है। इन सब वजहों से जिम्बाब्वे ने लीथियम के सहारे अपनी इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए इसके निर्यात पर रोक लगा दिया है।

इन कंपनियों को मिली है राहत

20 दिसंबर को जिम्बाब्वे के मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स एंड माइनिंग डेवलपमेंट ने देश के बेस मिनरल्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट के तहत एक आदेश पारित तिया। इसमें कहा गया कि देश को अपर-मिडल इनकम इकोनॉमी बनाने के प्रेसिडेंट Emmerson Mnangagwa के सपने को पूरा करने के लिए लीथियम के निर्यात पर रोक लगाई जाती है। हालांकि मंत्री के लिखित सहमति पर इसे बाहर भेजा जा सकेगा।

डिप्टी माइनिंग मिनिस्टर Polite Kambamura का कहना है कि इस नियम से उन माइनिंग कंपनियों को छूट है जिन्होंने प्रोसेसिंग प्लांट बनाया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन की दिग्गज माइनिंग और लीथियम ऑयन बैट्री मैटेरियन बनाने वाली कंपनी Zhejiang Huayou Cobalt, Sinomine Resource Group और Chengxin Lithium Group के पास जिम्बाब्वे के कुछ लीथियम माइन्स हैं। इसके अलावा इन्हें 67.8 करोड़ डॉलर के प्रोजेक्ट्स भी मिले हैं। ये कंपनियां जिम्बाब्वे में माइन और प्रोसेसिंग प्लांट्स बना रही हैं। इन्हें लीथियम निर्यात पर प्रतिबंध से राहत दी गई है।

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