ग्रेजुएट्स के लिए इंग्लैंड की नई वीजा स्कीम का इंडिया में विरोध हो रहा है। इंग्लैंड ने सोमवार को 'High Potential Individual' (HPI) वीजा स्कीम लॉन्च की है। इंग्लैंड इसके तहत दुनिया के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स को अपने यहां नौकरी करने की इजाजत देगा। लेकिन, इस स्कीम के लिए यूनिवर्सिटीज की लिस्ट में इंडिया की यूनिवर्सिटीज को शामिल नहीं किया गया है।
दरअसल, दुनिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटीज की लिस्ट में इंडिया का कोई भी आईआईटी संस्थान शामिल नहीं है। दुनिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स ही HPI वीजा स्कीम के तहत अप्लाई कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत ग्रेजुएट्स को दो साल का वीजा मिलेगा। PhD के स्टूडेंट्स को तीन साल का वीजा मिलेगा।
इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए कुछ शर्तें तय हैं। स्टूडेंट का इंस्टीट्यूशन तीन प्रमुख एजेंसियों की यूनिवर्सिटी रैंकिंग लिस्ट में से कम से कम दो में टॉप 50 में शामिल होना चाहिए। तीन एजेंसियों में QS, Times Higher Education और Ranking of World Universities शामिल हैं। इस रैंकिंग में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया की यूनिवर्सिटीज शामिल नहीं हैं।
हाल में आईं टॉप 50 यूनिर्सिटीज की लिस्ट में ज्यादातर अमेरिका की यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। फिर चीन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, जापान, कनाडा और सिंगापुर की यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। अगर कोई इंडियन स्टूडेंट्स इंग्लैंड की एचपीआई वीजा स्कीम का फायदा उठाना चाहता है तो उसे इन यूनिवर्सिटीज का स्टूडेंट होना जरूरी है।
Indian National Students Association UK के प्रेसिडेंट अमित तिवारी ने कहा, "आज इंग्लैंड पढ़ाने के लिए जाने वाले विदेशी स्टूडेंट्स में इंडिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इसलिए यह तथ्य कि नई वीजा स्कीम में इंडिया स्टूडेंट्स शामिल नहीं होंगे, तर्कसंगत नहीं लगता है। प्रोफेसर्स से लेकर R&D इकाइयां IIT और IIM ग्रेजुएट का सम्मान करते हैं। इंग्लैंड में अधिकारियों को इंडियन स्टूडेंट्स को दुधारू गाय मानना बंद करना चाहिए। "
इंडियन स्टूडेंट बॉडी NISAU UK की चेयरपर्सन सनम अरोड़ा ने कहा, "यूनिर्सिटीज की लिस्ट में पश्चिमी देशों का वर्चस्व है। मैं चाहूंगी कि इंस्टीट्यूशन के सेलेक्शन के लिए अपनाई गई मैथडलॉजी के बारे में बताया जाए। इससे पता चलेगा कि इंडिया की आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान क्यों नहीं इस लिस्ट में जगह बना सके हैं। उम्मीद है कि इंडिया की सरकार इस मसले को लेकर इंग्लैंड की सरकार से बात करेगी।"