भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन हाई कोर्ट से एक और झटका, प्रत्यर्पण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की नहीं मिली अनुमति

Nirav Modi Extradition: हाई कोर्ट ने 9 नवंबर को नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद हीरा कारोबारी ने लंदन के हाई कोर्ट में एक आवेदन दायर कर ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी

अपडेटेड Dec 15, 2022 पर 4:50 PM
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भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन हाई कोर्ट से एक और झटका

Nirav Modi Extradition: भारत में धोखाखड़ी (Fraud) और धनशोधन (Money Laundering) के आरोपी और भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) को अपने प्रत्यर्पण (Extradition) के खिलाफ कानूनी लड़ाई में एक और झटका लगा है। लंदन में हाई कोर्ट (UK High Court) ने मोदी को ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट (UK Supreme Court) में अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

हाई कोर्ट ने 9 नवंबर को नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद हीरा कारोबारी ने लंदन के हाई कोर्ट में एक आवेदन दायर कर ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी।

लंदन में ‘रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस’ में जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे ने फैसला सुनाया कि 'अपीलकर्ता (नीरव मोदी) की सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति के अनुरोध वाली अर्जी खारिज की जाती है।’

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पिछले महीने, 51 साल के हीरा कारोबारी की मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर दायर की गई अपील खारिज कर दी गई थी। अदालत ने मनोरोग विशेषज्ञों के बयान के आधार पर कहा था कि उसे ऐसा नहीं लगता कि नीरव की मानसिक स्थिति अस्थिर है और उसके खुदकुशी करने का जोखिम इतना ज्यादा है कि उसे पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के दो अरब डालर लोन घोटाला मामले में आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित करना अन्यायपूर्ण और दमनकारी कदम साबित होगा।

नीरव मोदी मार्च 2019 में प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तारी के बाद से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है।

Nirav Modi Extradition: इन दो मामलों में है आरोपी

नीरव पर दो मामले हैं। एक धोखाधड़ी से लोन एग्रीमेंट करके या सहमति-पत्र हासिल करके PNB के साथ बड़े स्तर पर जालसाजी करने से जुड़े मामला हैं। इसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच चल रही है। जबकि दूसरा मामला उस धोखाधड़ी से कमाए काले धन को सफेद में बदलने से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।

उस पर सबूतों को गायब करने और गवाहों को डराने-धमकाने के दो और आरोप भी हैं, जो सीबीआई के मामले में जोड़े गए हैं।

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