Rafale Fighter Jets: आखिरी राफेल विमान भी पहुंचा भारत, फ्रांस से सभी 36 एयरक्राफ्ट की डिलीवरी हुई पूरी

Rafale Fighter Jets: 2016 में दोनों देशों के बीच हुई 59 हजार करोड़ रुपये की डील के तहत कुल 36 राफेल विमानों को भारत भेजने का सौदा हुआ था। इससे पहले 35 राफेल जेट भारत को मिल चुके हैं

अपडेटेड Dec 15, 2022 पर 4:31 PM
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Rafale Fighter Jets: आखिरी राफेल विमान की लैंडिंग के साथ ही भारत को सभी 36 राफेल लड़ाकू एयरक्राफ्ट मिल गए हैं

फ्रांस (France) से हुए डील (Rafale Deal) के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमानों (Rafale Fighter Jets) की डिलीवरी पूरी हो गई है। भारत को फ्रांस के साथ हुए डील के तहत 36वां और आखिरी राफेल लड़ाकू विमान (36th Rafale Aircraft Lands in India) आज यानी गुरुवार को मिल गया। भारतीय वायुसेना (IAF) ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। आखिरी राफेल विमान गुरुवार को UAE में मिड-एयर रिफ्यूलिंग कराने के बाद भारत पहुंचा। बता दें कि भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ 59,000 करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर (Deal Sign) किए थे।

पहला राफेल विमान पिछले साल जुलाई में आया था। भारतीय वायुसेना एवं देश की सुरक्षा के लिए गेमचेंजर माने जा रहे राफेल फाइटर जेट की पहली खेप में 5 विमान अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर जुलाई 2020 में उतरे थे। भारत-फ्रांस के बीच कुल 36 राफेल विमानों की डील हुई थी। इनमें से 35 फ्रांस से पहले ही भारत पहुंच चुके हैं, जो हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासीमारा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात हैं। अब देखने वाली बात होगी कि इस आखिरी राफेल जेट की तैनाती कहां होती है।

भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को ट्वीट कर बताया कि 36वां राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से उड़कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास्ते होते हुए भारत पहुंच चुका है। राफेल ने UAE में ही हवा में ईंधन (Fuel) भरा था। अधिकारियों ने बताया कि फ्रांस ने हमें 36वां राफेल लड़ाकू विमान सभी स्पेयर और अन्य पार्ट्स के साथ उपलब्ध कराया है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, इन पार्ट्स का इस्तेमाल आगे किया जाएगा।


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LAC के पूर्वी क्षेत्र में हवाई अभ्यास शुरू करेगी IAF

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में पिछले हफ्ते के सैन्य गतिरोध के बाद भारत-चीन के मध्य ताजा तनाव के बीच भारतीय वायुसेना पूर्वोत्तर में आज से दो दिवसीय अभ्यास करेगी। इसमें करीब सभी युद्धक विमान और इस क्षेत्र में तैनात अन्य संसाधन शामिल किए जाएंगे। सूत्रों ने कहा कि अभ्यास का मकसद भारतीय वायुसेना की समग्र युद्धक क्षमता और इस क्षेत्र में सैन्य तैयारियों को परखना है। हालांकि, भारत और चीन की सेनाओं के बीच ताजा गतिरोध के बहुत पहले इस अभ्यास की योजना बनाई गई थी और इसका इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारतीय वायुसेना के Sukhoi Su-30MKI और राफेल जेट समेत कई अन्य एयरक्राफ्ट इसमें शामिल होंगे। सूत्रों ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में वायुसेना के सभी एयरफोर्स स्टेशन और कुछ एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स (LAG) को भी अभ्यास में शामिल किया जाना है। सेना और वायुसेना अरुणाचल और सिक्किम में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पूर्वी लद्दाख विवाद के बाद से पिछले दो सालों से उच्च स्तरीय तैयारियों को बरकरार रखती आई हैं।

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