अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने चीन में स्लोडाउन को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए खतरनाक बताया है। आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिन जॉर्जीवा (Kristalina Georgieva) ने गुरुवार को कहा कि चीन की इकोनॉमी में अगर लंबे समय तक स्लोडाउन की स्थिति रहती है तो इसका बड़ा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा।
चीन में कोरोना की नई लहर ने तबाही मचाई है। खासकर शंघाई में इसका असर ज्यादा था। इसे फैलने से रोकने के लिए सरकार ने शंघाई में लॉकडाउन लगा दिया। हालांकि, अब स्थिति सामान्य हो रही है। लेकिन, सप्लाई चेन पर इसका बड़ा असर बड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने मंगलवार को इस साल (2022) चीन की इकोनॉमी की ग्रोथ का अनुमान घटा दिया। उसने इसे 4.4 फीसदी कर दिया है, जो ग्रोथ के चीन के 5.5 फीसदी लक्ष्य के मुकाबले एक फीसदी से ज्यादा कम है। आईएमएफ ने चीन में कोरोना की नई लहर के इकोनॉमी पर असर के अनुमान को देखते हुए ग्रोथ रेट में कमी की है।
एक कार्यक्रम में अपनी स्पीच में आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्जीवा ने कहा कि चीन की सरकार के पास इकोनॉमी को सपोर्ट करने की गुंजाइश है। सरकार कंज्म्पशन बढ़ाने वाले उपायों का एलान कर सकती है। इससे इकोनॉमिक एक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इसी कार्यक्रम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की इकोनॉमी चैलेंज का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी लॉन्ग टर्म ट्रेंड में बदलाव नहीं आया है।
चीन की इकोनॉमी के लिए चैलेंज बढ़ रहा है। इस वजह से विदेश ब्रोकरेज फर्मों ने भी चीन की जीडीपी की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। बार्कलेज ने मंगलवार को चीन की ग्रोथ के अनुमान को 4.5 फीसदी से घटाकर 4.3 फीसदी कर दिया। बीओएफए ने इसे 4.8 फीसदी से घटाकर 4.2 फीसदी कर दिया।
जॉर्जीवा ने इंडिया की ज्यादा ग्रोथ रेट को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए अच्छा बताया है। आईएमएफ ने इस साल इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 8.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह चीन के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस तरह इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। हालांकि, चीन इंडिया के मुकाबले बहुत बड़ी इकोनॉमी है। इसलिए वहां ग्रोथ घटने का ज्यादा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा।