ईरान की शतरंज खिलाड़ी सारा खादेम को देश नहीं लौटने की धमकी, बिना हिजाब टूर्नामेंट में लिया था हिस्सा, अब स्पेन पहुंचीं

सारा खादेम (Sara Khadem) ने पिछले हफ्ते अल्माटी में फिडे वर्ल्ड रैपिड एंड ब्लिट्ज चेस चैंपियनशिप में हिजाब के बिना हिस्सा लिया था। हिजाब (Hijab) महिलाओं के लिए ईरान के सख्त ड्रेस कोड के तहत अनिवार्य है

अपडेटेड Jan 03, 2023 पर 8:13 PM
सारा खादेम ने अल्माटी में फिडे वर्ल्ड रैपिड एंड ब्लिट्ज चेस चैंपियनशिप में हिजाब के बिना हिस्सा लिया था

ईरान (Iran) की शतरंज खिलाड़ी (Chess Player) सारा खादेम (Sara Khadem) स्पेन पहुंची हैं। जी हां, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन खादेम स्पेन पहुंची क्यों, ये जानना जरूरी है। इसके पीछे कारण ये है कि उन्हें अपने ही देश में न लौटने की धमकी दी गई थी। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सारा खादेम को देश वापस नहीं लौटने के लिए कहा गया था, क्योंकि उन्होंने ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच कजाकिस्तान में एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिजाब (Hijab) के बिना ही हिस्सा लिया था।

सारा खादेम ने पिछले हफ्ते अल्माटी में फिडे वर्ल्ड रैपिड एंड ब्लिट्ज चेस चैंपियनशिप में हिजाब के बिना हिस्सा लिया था। हिजाब महिलाओं के लिए ईरान के सख्त ड्रेस कोड के तहत अनिवार्य है। इंटरनेशनल चेस फेडरेशन की वेबसाइट के मुताबिक, रैंकिंग में सारा खादेम 804 नंबर पर हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सारा खादेम को टूर्नामेंट के बाद कई फोन कॉल आए। इसमें उन्हें धमकियां दी गईं और ईरान वापस न आने की चेतावनी भी दी गई।


इसमें ये भी कहा गया कि सारा के स्पेन पहुंचने पर ईरान में रह रहे उनके परिवार वालों और रिश्तेदारों की भी धमकाया गया। Reuters ने बताया कि स्पेन में होटल के जिस कमरे में सारा ठहरी हुई हैं, उसके बाहर चार बॉडीगार्ड भी तैनात किए गए हैं।

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ईरान में ये सब तब शुरू हुआ, जब 22 साल की महसा अमीनी को मॉरलिटी पुलिस ने सही ढंग से हिजाब न पहनने के चलते हिरासत में ले लिया था। पुलिस हिरासत में महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद सितंबर के मध्य में देशभर में हिजाब के विरोध में जोरदार प्रदर्शन हुए थे।

इसके समर्थन में विदेशों में खेलने वालीं देश की कई महिला खिलाड़ी सार्वजनिक रूप से हिजाब के बिना दिखाई दीं।

1979 की क्रांति के बाद से इसे ईरान में सरकार के खिलाफ अब तक सबसे बड़ा प्रदर्शन माना गया है। जब सैकड़ों महिलाएं बिना हिजाब के सड़कों पर उतर आई थीं।

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