Israel Hamas War: कबाड़, सुरंग और तस्करी... हमास का देसी जुगाड़, ईरान का दिमाग, ऐसे हुई इजराइल पर इतने बड़े हमले की तैयारी

Israel Hamas War: हमास की एक सबसे बड़ी पहचान इजराइल के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाने की है। हालांकि, 7 अक्टूबर के हमले ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। हैरानी इस बात की है कि 360 वर्ग किलोमीटर में फैला ये इलाका, जहां एक तरफ से इजरायल, तो दूसरी तरफ मिस्र उसे कंट्रोल करता है। उस जगह से इतने बड़े हमले को अंजाम कैसे दिया गया और इसकी कानों कान किसी को भनक तक नहीं हुई

अपडेटेड Oct 13, 2023 पर 4:42 PM
Israel Hamas War: हमास का देसी जुगाड़, ईरान का दिमाग, ऐसे हुई इजराइल पर इतने बड़े हमले की तैयारी

Israel Hamas War: फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह (Palestinian extremist group) हमास (Hamas) ने इजराइल (Israel) पर अपना अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है, जिसमें आतंकवादियों ने हजारों रॉकेट दागे। हमास ने जिस तरह तीन तरफ-जमीन, आसमान और समुद्र से ये हमला किया, वो वाकई चौंकाने वाला था। इतना ही नहीं उसने बॉर्डर फेंसिंग को बुलडोजर से तोड़ा, मोटरबाइक और स्पीडबोट और पैराग्लाइडर से हमास के लड़ाके गाजा (Gaza) सीमा के करीब इजराइली इलाकों में भी घुस गए।

हमास की एक सबसे बड़ी पहचान इजराइल के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाने की है। हालांकि, 7 अक्टूबर के हमले ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। हैरानी इस बात की है कि 360 वर्ग किलोमीटर में फैला ये इलाका, जहां एक तरफ से इजरायल, तो दूसरी तरफ मिस्र उसे कंट्रोल करता है। उस जगह से इतने बड़े हमले को अंजाम कैसे दिया गया और इसकी कानों कान किसी को भनक तक नहीं हुई।

उससे भी चौंकाने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला ये इलाका, जहां गरीबी है और संसाधन भी बहुत कम हैं, उस गाजा पट्टी में हमास ने इतना गोला बारूद कब, कहां और कैसे जुटा लिया?


जानकारों की मानें, तो इसका जवाब- चालाकी, कामचलाऊ व्यवस्था, दृढ़ता और विदेशी मदद है। आज इसी पर एक नजर डालते हैं कि ये हमास क्या है और इसके पास हथियारों की इतनी खेप कैसे पहुंचती है।

हमास की स्थापना 1987 में मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में की गई थी, जो फिलिस्तीनियों की तरफ से इजराइल के खिलाफ पहले इंतिफादा विद्रोह के तुरंत बाद किया गया था।

Israel Hamas War: कितनी बड़ी है इजराइल की सेना? गाजा पर जमीनी हमले के लिए इकट्ठा किए 3,00,000 रिजर्व सैनिक

इंतिफादा का मतलब है- वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर इजरायली कब्जे के खिलाफ हुए फिलिस्तीनी विद्रोह। पहला इंतिफादा 1987 से 1993 तक चला और दूसरा 2000 में शुरू हुआ।

हमास को तीन स्तंभों पर बनाया गया था- धर्म, दान और इजराइल के खिलाफ लड़ाई। साथ ही इसके एक मिलिट्री विंग की स्थापना की गई, जिसका नाम इज़ अल-दीन अल-क़सम ब्रिगेड (Izz al-Din al-Qassam) रखा गया। इसका नाम 1920 के दशक में सक्रिय रही उग्रवादी सीरियाई उपदेशक के नाम पर रखा गया।

2006 में चुनाव जीतने के बाद से गाजा पट्टी का नियंत्रण हमास के हाथ में है। इस इलाके से इजराइल की वापसी के एक साल बाद यहां चुनाव कराए गए थे। इसके बाद से इसकी सीमाओं और हवाई क्षेत्र को इजराइल और मिस्र बड़ी ही सख्ती से कंट्रोल करते आ रहे हैं।

गाजा की ज्यादातर युवा आबादी हमास के शासन के तहत पैदा हुई। वहीं कुछ बुजुर्ग फिलिस्तीनी, जो फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (PLO) में भ्रष्टाचार से निराश थे, उन्होंने भी हमास को ही वोट दिया।

हमास का मकसद क्या है?

PLO के उलट, हमास इजरायल राज्य को मान्यता नहीं देता है। जबकि PLO को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीनी नेतृत्व के रूप में स्वीकार कर लिया गया था। क्योंकि उसने 1993 में ओस्लो समझौते के बाद इजरायल के शांतिपूर्वक अस्तित्व के अधिकार को मान लिया था।

इसके बजाय, हमास अपनी ऐतिहासिक सीमाओं के आधार पर भूमध्य सागर से जॉर्डन नदी तक फैले फिलिस्तीनी राज्य की वकालत करता है।

हमास को कहां से मिलते हैं हथियार?

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि हमास को ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह का खुला समर्थन है। सवाल ये है कि हमास के पास हथियार कैसे पहुंचते हैं और इस हमले के लिए उसने किस तरह से तैयारी की थी।

CIA की वर्ल्ड फैक्टबुक में कहा गया है, "हमास अपने हथियार खुद भी बनाता है और तस्करी के जरिए भी हासिल करता है। इसके अलावा उसे ईरान से कुछ सैन्य मदद भी मिलती है।"

7 अक्टूबर के हमले में सीधे तौर पर ईरान की भूमिका को लेकर अमेरिका और इजराइल को फिलहाल कोई सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस्लामिक गणराज्य लंबे समय से हमास का बड़ा सैन्य समर्थक रहा है। ये हमास को सीमा पार सुरंगों और नाव के जरिए गाजा में हथियारों की तस्करी करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही इजराइल और मिस्र लगातार हमास के टनल इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करते रहते हों, लेकिन उसके सरंग का जाल अब भी काफी बड़ा है। हमास को ईरान से इन सुरंग के जरिए ही गाजा पट्टी तक हथियार पहुंचते हैं। इसमें अक्सर लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार शामिल होते हैं।

Palestine Labenon

इसके अलावा समुद्र के जरिए ईरान हमास को अपनी एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलें भी भेजता है। हालांकि, कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि ईरान हमास का मेंटोर भी रहा है। क्योंकि ईरान ने हमास को उसके स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग में भी मदद की, जिससे हमास को अपने शस्त्रागार बनाने में मदद मिली।"

लेबनान में रहने वाले हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Russia Today के अरबी-न्यूज चैनल RTArabic को हमास के हथियार बनाने के बारे में जानकारी दी थी।

हमास नेशनल रिलेशन्स अब्रॉड के प्रमुख अली बराका ने बताया, "हमारे पास हर चीज के लिए, जैसे कि 250 Km, 160 km, 80 Km और 10 Km की रेंज वाले रॉकेट के लिए लोकल फैक्टरियां हैं। हमारे पास मोर्टार और उनके गोले बनाने के कारखाने हैं।"

अली ने बताया, "हमारे पास कलाश्निकोव राइफल और उनकी गोलियों के कारखाने हैं। हम रूस की अनुमति से गोलियों का निर्माण कर रहे हैं। हम इसे गाजा में बना रहे हैं।"

Palestine Attack (1)

उन्होंने बताया, बड़े हथियारों के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स लगभग दो दशकों से हमास के इंजीनियरों को हथियार की ट्रेनिंग दे रही है। ये ईरानी सेना की एक यूनिट है, जिसकी जवाबदेही सीधा ईरान के सुप्रीम लीडर को है। तेहरान हमास के हथियार बनाने वालों को ट्रेनिंग भी देता है। हमास के रॉकेट और मिसाइल इंजीनियर ईरान के रीजनल नेटवर्क का हिस्सा हैं।

लेकिन एक सवाल ये भी है कि हमास अपने देसी हथियारों के लिए कच्चा माल कैसे जुटाता है? तो इसकी भी एक अनोखी तरकीब है।

गाजा में ऐसी कोई भी हेवी इंडस्ट्री नहीं है, जो दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में हथियारों के प्रोडक्शन का समर्थन कर सके। CIA फैक्टबुक के अनुसार, इसकी मेन इंडस्ट्री कपड़ा, फूड प्रोसेसिंग और फर्नीचर हैं। उससे भी ज्यादा इसका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट स्क्रैप आयरन है, जो गाजा के नीचे सुरंग नेटवर्क में हथियार बनाने के लिए सबसे ज्यादा मटेरियल दे सकता है।

हमास ने कैसे की इजराइल पर इतने बड़े हमले की तैयारी?

लेबनान में हमास के अधिकारी बराका ने कहा कि उनका संगठन पिछले दो साल से 7 अक्टूबर को किए गए इस हमले की तैयारी कर रहा था।

हालांकि, उन्होंने हमले की योजना में किसी बाहरी ताकत का कोई जिक्र नहीं किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि हमास के सहयोगी “हथियारों और पैसे से हमारा समर्थन करते हैं।” हालांकि, उन्होंने ये माना कि वो ईरान ही है, जो उन्हें पैसा और हथियार देता है।

हमास ने तकनीकी सहायता और ईरान से तस्करी किए गए हिस्सों के साथ गाजा के भीड़भाड़ वाले शहर में एक सीक्रेट वर्कशॉप में मिसाइल, रॉकेट और आत्मघाती ड्रोन का निर्माण किया है।

इजराइल के हमलों से जुटाया सामान

एक बात और कि कहीं न कहीं गाजा पर इजराइल के पिछले हमलों से भी हमास को हथियार बनाने में काफी मदद मिली है। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हो सकता है?

इसका जवाब कुछ विशेषज्ञ ऐसे देते हैं, जब इजरायली गाजा पर हवाई हमले करते थे, तो उसके बाद क्या बचता था- मेटल शीट, मेटल पाइप, सरिया, बिजली के तार... बस इन सब को हमास के लड़ाके इकट्ठा करते और अपने हथियारों की वर्कशॉप में ले जाते। जहां ये कबाड़ रॉकेट ट्यूब या दूसरे विस्फोटक डिवाइस का रूप ले लेते।

इससे ये कहना गलत नहीं होगा कि IDF के ऑपरेशन ने भी अप्रत्यक्ष रूप से हमास को वो मटेरियल दिला दिया, जिसे गाजा में सीधे तौर पर लाना हमास के लिए मुश्किल था या पट्टी में उस सामान पर प्रतिबंध है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।