Facebook के फाउंडर मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) के लिए बीता एक साल अच्छा नहीं रहा है। सितंबर 2021 से अब तक उनकी आधी संपत्ति स्वाहा हो गई है। यह अमाउंट 76.8 अरब डॉलर के बराबर है। इस वजह से जकरबर्ग अमेरिका के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट Forbes 400 में तीसरे पायदान से 11वें पायदान पर आ गए हैं। पहली बार वह इस लिस्ट के टॉप 10 से बाहर हुए हैं।
फोर्ब्स की लिस्ट के मुताबिक, अभी जकरबर्ग का नेटवर्थ 57.7 अरब डॉलर है। वह लिस्ट में Walmart के उत्तराधिकारी Jim Walton, Michael Bloomberg, Microsoft के पूर्व CEO स्टीव बाल्मर और Google के फाउंडर्स सर्गेई ब्रिन और Larry Page से नीचे आ गए हैं।
जकरबर्ग के नेटवर्थ में आई कमी की वजह Meta के शेयरों में आई गिरावट है। मेटा फेसबुक की पेरेंट कंपनी है। पिछले एक साल में कंपनी के शेयर 57 फीसदी गिर चुके हैं। आम तौर पर मार्केट में गिराव के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आती है। लेकिन, पिछले एक साल में मेटा के शेयरों में अमेरिकी बाजार के प्रमुख सूचकांकों और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है।
पिछले एक साल में Nasdaq करीब 10 फीसदी गिरा है। एसएंडपी 500 में 13 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। माइक्रोसॉफ्ट का शेयर 14 फीसदी गिरा है। गूगल की पेरेंट कंपनी Alphabet के शेयर 25 फीसदी और एमेजॉन का शेयर 27 फीसदी गिरा है।
Zuckerberg पहली बार 2008 में बिलियनेयर बने थे। तब फेसबुक की शुरुआत हुए सिर्फ चार साल हुए थे। तब 23 साल की उम्र में वह सेल्फ-मेड बिलियनेयर बनने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे। फोर्ब्स 400 की लिस्ट मे वह 321वें पायदान पर थे। तब उनका नेट वर्थ 1.5 अरब डॉलर था। यह 2011 तक बढ़कर 17.5 अरब डॉलर हो गया था।
मेटा के शेयरों में आई गिरावट ने इसके शेयरधारकों को निराश किया है। पिछले साल एप्पल ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया था। इसके बाद टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए यूजर्स को ट्रैक करना मुश्किल हो गया। इसका असर मेटा के ऐड रेवेन्यू पर पड़ा। जुलाई में मेटा ने पहली तिमाही के रेवेन्यू के डेटा जारी किए थे। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 1 फीसदी गिरकर 28.8 अरब डॉलर पर आ गया था।
ऐड रेवेन्यू के मामले में मेटा को टिकटॉक से कड़ी टक्कर मिल रही है। उधर, कंपनी वर्चुअल रियल्टी और मेटावर्स में भारी निवेश कर रह रही है। इससे कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में कमी आई है। जकरबर्ग पहली बार ऐसे संकट का सामना नहीं कर रहे हैं। 2012 में फेसबुक के निराशाजनक आईपीओ प्लान के बाद वह फोर्ब्स की लिस्ट में 14वें पायदान से लुढ़कर 36वें पायदान पर आ गए हैं। लेकिन, अगले साल ही उन्होंने नुकसान की भरपाई कर ली थी।