पाकिस्तान: मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए नेशनल असेंबली में पास हुआ विधेयक, FATF का खतरा हमेशा के लिए खत्म?

संसद के निचले सदन ने बृहस्पतिवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें FATF से संबंधित सभी संस्थाओं को एक तंत्र के तहत लाने, धन शोधन और आतंक के वित्तपोषण को नियंत्रित करने के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है। पिछले साल, पाकिस्तान को आतंकी वित्तपोषण और धन शोधन पर वैश्विक निगरानी संस्था FATF की ‘ग्रे’ लिस्ट से हटा दिया गया था। चार साल पहले पाकिस्तान को इस लिस्ट में शामिल किया गया था

अपडेटेड Aug 04, 2023 पर 8:34 PM
पाकिस्तान: मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए नेशनल असेंबली में पास हुआ विधेयक

पाकिस्तान (Pakistan) की नेशनल असेंबली (National Assembly) ने एक विधेयक पारित किया है, जिसे सही से लागू करने पर देश को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ‘ग्रे’ लिस्ट (Gray List) से हमेशा के लिए निकलने में मदद मिलेगी। संसद के निचले सदन ने बृहस्पतिवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें FATF से संबंधित सभी संस्थाओं को एक तंत्र के तहत लाने, धन शोधन और आतंक के वित्तपोषण को नियंत्रित करने के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है।

पिछले साल, पाकिस्तान को आतंकी वित्तपोषण और धन शोधन पर वैश्विक निगरानी संस्था FATF की ‘ग्रे’ लिस्ट से हटा दिया गया था। चार साल पहले पाकिस्तान को इस लिस्ट में शामिल किया गया था।

Express Tribune अखबार की खबर के मुताबिक, विधेयक राष्ट्रीय धन शोधन और आतंक वित्तपोषण रोधी प्राधिकरण कानून-2023 को विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने पेश किया। खार ने कहा कि प्रस्तावित कानून FATF से संबंधित सभी संस्थाओं को एक प्राधिकरण के तहत लाएगा।


खबर में कहा गया है कि वर्तमान में, आतंकवाद के वित्तपोषण और लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों को अलग-अलग कानूनों के तहत लागू किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से 2010 का धन शोधन अधिनियम, 1997 का आतंकवाद रोधी अधिनियम और 1948 का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अधिनियम शामिल हैं।

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पाकिस्तान को कब पेरिस स्थित FATF की ‘ग्रे’ लिस्ट में डाला गया था, इसका जिक्र करते हुए खार ने कहा कि प्रस्तावित प्राधिकरण एक मुख्य संस्था के रूप में काम करेगा और देश को धन शोधन तथा आतंकी वित्तपोषण के खतरे को रोकने के लिए एकीकृत कदम उठाने में मदद करेगा।

खबर में खार के हवाले से कहा गया, "यह एक अच्छा विधेयक है। अगर इसे ठीक से लागू किया जाता है, तो इंशाअल्लाह पाकिस्तान कभी FATF की ग्रे लिस्ट में नहीं जाएगा।"

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून अलग-अलग संस्थाओं को एकीकृत बनाएगा और इससे पाकिस्तान को काफी फायदा होगा।

साल 2018 में, FATF ने धन शोधन और आतंकी वित्तपोषण से निपटने के लिए अपने कानूनी, वित्तीय, नियामक, जांच, अभियोजन, न्यायिक और गैर-सरकारी क्षेत्रों में पाकिस्तान में कर्मियों को रेखांकित किया, जिन्हें वैश्विक वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।

प्रधानमंत्री की तरफ से नियुक्त किए जाने वाले अध्यक्ष के नेतृत्व में, प्राधिकरण में वित्त, विदेशी मामले और आंतरिक प्रभाग के सचिव और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर शामिल होंगे।

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