Pakistan Economy: पड़ोसी देश पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. यूक्रेन में युद्ध और पिछले साल देश के कुछ हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ के चलते देश में ऊर्जा और भोजन की कमी हो गई है। इसके साथ ही, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत खराब है और वहां महंगाई भी काफी बढ़ गई है। हालांकि, इस तरह का आर्थिक संकट पाकिस्तान के लिए नया नहीं है, लेकिन मौजूदा संकट ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। आखिर इस आर्थिक संकट की वजह क्या है। आइए समझते हैं।
क्या है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत को हमने प्रमुख इंडिकेटर की मदद से समझने की कोशिश की है, जिन्हें आप नीचे टेबल में देख सकते हैं।
पाकिस्तान के आर्थिक संकट के क्या कारण हैं?
देश के लिए आर्थिक संकट कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट में जी रहा है। नीचे दिए गए चार्ट से पता चलता है कि कैसे पाकिस्तान की एवरेज जीडीपी ग्रोथ रेट 1980 के दशक तक भारत और दक्षिण एशिया की औसत जीडीपी वृद्धि से अधिक थी, लेकिन 1980 के बाद इसमें तेज गिरावट देखी जा सकती है। 1990 के दशक से पाकिस्तान की औसत वृद्धि लगभग 4.5 प्रतिशत रही है। इसी अवधि में भारत और दक्षिण एशिया की औसत वृद्धि क्रमश: 6.2 प्रतिशत 5.9 प्रतिशत अधिक रही है।
दक्षिण एशिया की जीडीपी में पाकिस्तान की हिस्सेदारी 1960 के दशक में 10 प्रतिशत से बढ़कर 1980 के दशक में 15 प्रतिशत हो गई और 2010 के दशक में घटकर 10 प्रतिशत पर आ गई। जबकि इसी अवधि में दक्षिण एशिया की जीडीपी में भारत की जीडीपी की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गई है।
पिछले दशकों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता काफी कम हो गई है। 1990 के बाद से एवरेज इन्फ्लेशन 8 प्रतिशत से ऊपर रही है। देश ऑयल इंपोर्ट पर अत्यधिक निर्भर है और किसी बड़े एक्सपोर्ट के अभाव में चालू खाते का घाटा बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान वित्तीय सहायता के लिए हमेशा IMF के पास पहुंचता है। देश ने 23 बार आईएमएफ की मदद ली है। IMF अपने सदस्यों को एक कोटा के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है जिसकी गणना सदस्य देश के योगदान के आधार पर की जाती है। वर्तमान में, पाकिस्तान पहले ही आईएमएफ से अपने कोटे के दोगुने से अधिक उधार ले चुका है।
इस छोटे से इतिहास को देखते हुए पाकिस्तान के संकट में कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान के आर्थिक संकट का मूल कारण उसकी राजनीति है। पाकिस्तान के इतिहास में ज्यादातर समय सेना और राजनीतिक दलों के बीच सत्ता के लिए लगातार संघर्ष देखने को मिला है, जिसके चलते देश में स्थिर सरकार नहीं रही है। यहां तक कि जब राजनीतिक दल सत्ता में होते हैं, तो सत्ताधारी दल में आंतरिक लड़ाई और विपक्षी दबाव भी देखने को मिलता है। पिछले 10 सालों में देश में 6 प्रधानमंत्री हुए हैं।
राजनीतिक मजबूरियों और खराब आर्थिक प्रदर्शन के कारण सभी सरकारें खर्च करती हैं और लोगों को मुफ्त सुविधाएं प्रदान करती हैं। हाल ही में आई बाढ़ ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। IMF आर्थिक सुधारों से गुजर रहे देश के आधार पर धन प्रदान करता है, जिससे हायर ग्रोथ और लोवर इन्फ्लेशन और घाटे के स्तर को बढ़ावा मिलना चाहिए। लेकिन उसकी राजनीति के कारण पाकिस्तान के आर्थिक सुधार होते भी हैं तो बहुत कम समय के लिए।
आगे की राह हो सकती है और मुश्किल
महामारी और युद्ध के कारण पाकिस्तान को दूसरे देशों से सपोर्ट भी नहीं मिल पा रहा है। चीनी अर्थव्यवस्था, जो इन संकटग्रस्त दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख समर्थक थी, स्वयं महामारी और लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट में रही है। IMF की लोन देने की शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें राजनीतिक बाधाओं को देखते हुए हासिल करना मुश्किल है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और उसके लोगों के लिए बहुत कठिन समय आने वाला है। सरकार के पास आईएमएफ से लोन लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, जो वह कर रही है। आईएमएफ ऋण सरकारी खर्च पर प्रतिबंध लगाएगा जो लोगों के लिए और अधिक कठिनाइयों का कारण बन सकता है।