India-China LAC Agreement: अमेरिका ने कहा है कि वह भारत-चीन सीमा पर तनाव की स्थिति कम होने का स्वागत करता है। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली ने इस संबंध में उसे जानकारी दी है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले पर नई दिल्ली के संपर्क में रहने के बावजूद उसने भारत और चीन के बीच सीमा संघर्ष के समाधान में कोई भूमिका नहीं निभाई। यह टिप्पणी भारत और चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने पर सहमत होने के कुछ दिनों बाद आई है।
विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने मंगलवार को अपने दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा, "हम भारत और चीन के बीच के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम समझते हैं कि दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों को वापस बुलाने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। हम सीमा पर तनाव की स्थिति में किसी भी कमी का स्वागत करते हैं।"
मिलर ने एक सवाल पर कहा कि अमेरिका की इसमें कोई भूमिका नहीं है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, "हमने अपने भारतीय साझेदारों से बात की है और हमें इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन हमने इस समाधान में कोई भूमिका नहीं निभाई है।"
सैन्य वापसी अंतिम चरण में है: सूत्र
आधिकारिक सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और देपसांग नामक दो टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी अंतिम चरण में है। सेना के सूत्रों ने 25 अक्टूबर को कहा था कि सैन्य वापसी की प्रक्रिया 28-29 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना है।
उन्होंने कहा था कि समझौते की रूपरेखा पर पहले राजनयिक स्तर पर हस्ताक्षर किए गए और फिर सैन्य स्तर की बातचीत हुई। सेना के सूत्रों ने यह भी कहा था कि कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता में समझौते की बारीकियों पर काम किया गया, जिस पर पिछले सप्ताह हस्ताक्षर किए गए थे।
दोनों पक्षों के बीच समझौतों के अनुपालन में भारतीय सैनिकों ने इन क्षेत्रों में अपने उपकरणों को पीछे ले जाना शुरू कर दिया था। संबंधित प्रक्रिया के बारे में मंगलवार को एक अधिकारी ने कहा कि दोनों टकराव बिंदुओं से वापसी अंतिम चरण में है। सूत्रों ने पिछले सप्ताह कहा था कि समझौता केवल इन दो टकराव बिंदुओं के लिए हुआ था और अन्य क्षेत्रों के लिए बातचीत अभी भी जारी है।
सूत्रों ने कहा है कि पिछले हफ्ते शुरू हुई सैन्य वापसी के पूर्ण होने के बाद इन क्षेत्रों में गश्त शुरू हो जाएगी और दोनों पक्ष अपने-अपने सैनिकों को हटा देंगे तथा अस्थायी संरचनाओं को नष्ट कर देंगे। सूत्रों ने कहा कि इन क्षेत्रों में गश्त की स्थिति को अप्रैल 2020 से पहले के स्तर पर वापस ले जाने की उम्मीद है। इस संबंध में एक सूत्र ने कहा कि गश्त सशस्त्र कर्मियों द्वारा की जाएगी और ध्वस्त की जाने वाली संरचनाओं में अस्थायी शेड तथा तंबू शामिल हैं।
यह प्रक्रिया पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त और सैनिकों की वापसी पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद हो रही है। यह चार साल से अधिक समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की दृष्टि से एक बड़ी सफलता है। जून 2020 में गलवान घाटी में भीषण झड़प के बाद दोनों एशियाई शक्तियों के बीच संबंध खराब हो गए थे। यह दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था।