अमेरिका में ट्रंप प्रशासन इन दिनों एक के बाद एक फैसले रहा है। जिससे पूरी दुनिया हैरान है। कई देशों में टैरिफ लगाने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। ट्रंप प्रशासन ने उपभोक्ता वित्तीय सुरक्षा ब्यूरो (Consumer Financial Protection Bureau – CFPB) के प्रमुख रोहित चोपड़ा को पद से हटा दिया। चोपड़ा का कार्यकाल साल 2026 तक था। लेकिन कार्यकाल खत्म होने के पहले ही इस पद से हटा दिया गया है। चोपड़ा को उपभोक्ता सुरक्षा कानूनों को लागू करने और उनका विस्तार करने के लिए जाना जाता था। उनकी नियुक्ति जो बाइडेन प्रशासन में हुई थी।
चोपड़ा का कार्यकाल 5 साल का था। लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही विदाई हो गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने अपना इस्तीफा शेयर किया है। जिसमें उन्होंने लिखा कि इस समय जब बहुत अधिक शक्ति कुछ हाथों में सिमट गई है, ऐसे में सीएफपीबी जैसे एजेंसियां और भी अहम हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद तुरंत हटाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन वे दो हफ्तों तक बने रहे और इस दौरान उन्होंने 20 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही कई रिपोर्ट जारी करने जैसे महत्वपूर्ण काम किए हैं। हर दिन, देश भर से अमेरिकी लोग हमारे साथ अपने विचार और अनुभव शेयर करते हैं। आपने हमें शक्तिशाली कंपनियों और उनके अधिकारियों को कानून तोड़ने के लिए जवाबदेह बनाने में मदद की है। आपने हमारे काम को बेहतर बनाया है। वहीं इस मामले में एड्वोकेसी ग्रुप प्रोग्रेसिव चेंज कैम्पेन कमेटी ने रोहित को पद से हटाए जाने पर कड़ी निंदा की है। उन्होंने राष्ट्रपति पर दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।
उपभोक्ताओं के हित में रोहित ने लिए कठोर फैसले
रोहित चोपड़ा का काम वॉल स्ट्रीट के लिए परेशानी का सबब बन गया। उन्होंने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कई कठोर कदम उठाए थे। उन्होंने बैकों से ओवरड्राफ्ट फीस (जब खाते में पैसे कम होते हैं तो बैंक जो अतिरिक्त शुल्क लगाता है) को कम करने के लिए कहा था। इसके अलावा, उन्होंने वेल्स फार्गो बैंक को 2022 में ग्राहकों को हुए नुकसान के लिए दो अरब डॉलर चुकाने का आदेश भी दिया था।
इसके अलावा, उन्होंने बड़ी तकनीकी कंपनियों की उपभोक्ता भुगतान सेवाओं और डाटा के उपयोग पर सख्त नियम बनाए थे। जिसे बैंकों और कारोबारियों के ग्रुप ने सराहना की थी। हालांकि, कुछ लोग उनके इस फैसले का विरोध भी कर रहे थे।
सीएफपीबी को 2011 में बनाया गया था। इसे ऐसे बनाया गया था कि इस पर राजनीतिक असर न पड़े। कहने का मतलब ये हुआ कि इसके कामकाज पर राजनीतिक दखलंदाजी न हो। लेकिन 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया का राष्ट्रपति इस एजेंसी के प्रमुख को बिना कारण बताए हटा सकते हैं।