खालिस्तानी आतंकी और सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannun) की कथित हत्या की कोशिश के आरोप में अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने भारतीय मूल के निखिल गुप्ता (Nikhil Gupta) को इसी साल 30 जून को गिरफ्तार किया था। निखिल फिलहाल चेक रिपब्लिक की जेल में बंद है। चेक गणराज्य के अधिकारियों ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत गुप्ता को गिरफ्तार किया था। इस बीच, निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर उनके वकील ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
निखिल गुप्ता के वकील ने प्राग कोर्ट के सामने 'गलत पहचान (Mistaken Identity)' की दलील दी है। वकील ने दावा किया कि भारत में निखिल नाम के हजारों लोग रहते हैं और इस केस में गलत शख्स को गिरफ्तार किया गया है।
निखिल ने खुद को बताया कारोबारी
वकील ने कोर्ट को बताया कि निखिल गुप्ता एक कारोबारी हैं और उनकी सफलता से नाखुश लोगों ने फर्जी आरोप लगाकर उन्हें निशाना बनाया है। हालांकि, कोर्ट ने दलील खारिज कर दी। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 12 दिसंबर को भी भारत में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर अपनी याचिका में निखिल गुप्ता के परिवार ने यही दावा किया था कि चेक गणराज्य में उनकी गिरफ्तारी गलत पहचान का मामला है। हालांकि, प्राग की निचली अदालत ने गुप्ता के वकील द्वारा दिए गए इसी तरह के तर्क को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि अमेरिका ने बहुत विशिष्ट जानकारी शेयर की थी जिससे उसकी सटीक पहचान हुई।
23 नवंबर को कोर्ट ने प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला सुनाया था। बताया जाता है कि गुप्ता के वकील ने अदालत में कहा था कि भारत में लाखों लोग निखिल नाम से रहते हैं और उसे गलत समझा गया कि वह कोई और है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने तर्क दिया था कि एक व्यापारी होने के नाते गुप्ता का आपराधिक गतिविधि में कोई संलिप्ता नहीं है, इसलिए उनकी सलता से ईर्ष्या करने वाले लोगों ने उन्हें निशाना बनाया होगा। वही इन आरोपों के पीछे भी हो सकते हैं।
बता दें कि अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि निखिल गुप्ता नाम का व्यक्ति सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश में भारत सरकार के एक कर्मचारी के साथ काम कर रहा था। पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। हालांकि, भारत ने आरोपों की जांच के लिए पहले ही एक जांच समिति का गठन कर दिया है।
अमेरिका के आरोपों पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सिख अलगाववादी को निशाना बनाने की नाकाम साजिश का संबंध भारत से होने को लेकर अमेरिका के आरोपों पर अपनी पहली टिप्पणी में कहा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है और अगर कोई सूचना देता है तो वह इस पर गौर करेगा। ब्रिटिश अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय मजबूत समर्थन है और कुछ घटनाओं को राजनयिक संबंधों से जोड़ा जाना उचित नहीं है।
पीएम मोदी ने कहा, "अगर कोई हमें कोई सूचना देता है तो हम निश्चित तौर पर उस पर गौर करेंगे।" उन्होंने कहा, "अगर हमारे किसी नागरिक ने कुछ भी अच्छा या बुरा किया है, तो हम उस पर गौर करने के लिए तैयार हैं। हमारी प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है।" इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि भारत विदेशों में स्थित कुछ चरमपंथी समूहों की गतिविधियों को लेकर बहुत चिंतित है।
चरमपंथी समूहों को लेकर जताई चिंता
उन्होंने कहा, "ये तत्व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में डराने-धमकाने और हिंसा भड़काने में लगे हुए हैं।" साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा, "इस संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए मजबूत द्विपक्षीय समर्थन है, जो एक परिपक्व और स्थिर साझेदारी का स्पष्ट संकेतक है।" पीएम मोदी ने कहा, "सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग हमारी साझेदारी का एक प्रमुख घटक रहा है।"
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कुछ घटनाओं को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों से जोड़ा जाना उचित है।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि रक्षा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हो रहे हैं।