अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले आतंकवादी संगठन तालिबान ने कहा है कि महिलाओं को इस्लामिक कानून या शरिया के दायरे के तहत अधिकार दिए जाएंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इससे उनका क्या मतलब है। शरिया में अलग व्याख्या करने की काफी गुंजाइश है। तालिबान की पिछली सत्ता के दौरान लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा रोक दी गई थी और नैतिकता के तालिबान के नियमों का उल्लंघन करने वालों को सार्वजनिक तौर पर कोड़े लगाए जाते थे।
तालिबान के कट्टरपंथियों ने अभी यह नहीं बताया है कि वह इसे कैसे लागू करना चाहते हैं। हालांकि, अफगानिस्तान की लाखों महिलाओं को पुराने दौर की क्रूरता लौटने का डर है।
कुरान पर आधारित शरिया में इस्लाम के नैतिक और कानूनी तौर तरीकों को तय किया गया है। कुरान में नैतिक जीवन के रास्ते की जानकारी है लेकिन इसमें विशेष कानून नहीं हैं।
मुस्लिम देशों में शरिया की व्याख्या को लेकर काफी बहस होती रही है। इसे लागू करने वाली सरकारों की कानूनी व्यवस्थाएं भी एक दूसरे से अलग हैं।
अफगानिस्तान में महिलाओं पर शरिया का असर
तालिबानी नेताओं के हाल के व्यवहार से यह जानने की कोशिश की जा रही है क्या महिलाओं को लेकर उनके रवैये में बदलाव होगा। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में एक महिला टेलीविजन एंकर को इंटरव्यू दिया था। इसका उद्देश्य दुनिया और अफगानिस्तान के लोगों को यह दिखाना था कि तालिबान का रवैया पहले से बदला है।
हालांकि, इसके कुछ ही घंटे बाद सरकारी टेलीविजन की एक महिला एंकर ने बताया कि तालिबान ने उसे और चैनल में काम करने वाली अन्य महिलाओं को निलंबित कर दिया है।