वो दिन चले गए जब रिटायरमेंट 58-60 साल की उम्र में हुआ करता था और लोग उसके लिए मानसिक तौर पर तैयार रहा करते थे। जैसे कम्प्यूटर की जगह आईपैड और टैबलेट आ गए, टैलीफोन की जगह मोबाइल फोन और मल्टी सिम फोन आ गए और नोटबुक आ गई उसी तरह रिटायरमेंट के लिए भी युवाओं की सोच बदल गई है। आजकल के युवा सबकुछ जल्दी और बेहतर स्थिति में चाहते हैं। इसलिए वो रिटायरमेंट भी 45-50 साल की उम्र में ले लेना चाहते हैं। जल्दी रिटायरमेंट लेकर वो अपनी मर्जी से कुछ करना चाहते हैं और अपनी पूंजी का इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन ये सब योजनाएं तभी पूरी हो सकती हैं अगर उनके पास खर्च करने के लिए पर्याप्त रकम हो। इसलिए रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी हो जाता है और इसे किसी भी हालत में टाला नहीं जा सकता है।
