SIP Calculator: ₹5000 की SIP करनी है! लार्ज, मिड या स्मॉल कैप... किसमें लगाएं पैसा? समझिए कैलकुलेशन
SIP Calculator: ₹5,000 की SIP में Large Cap, Mid Cap और Small Cap में क्या बेहतर है? 15 साल के निवेश में तीनों कैटेगरी का जोखिम और संभावित रिटर्न अलग रहता है। जानिए ₹9 लाख निवेश पर ऐतिहासिक औसत रिटर्न के आधार पर कितना फंड बन सकता है।
अगर आप पहली बार इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहे हैं, तो लार्ज कैप से शुरुआत करना आसान हो सकता है।
SIP Calculator: हर महीने ₹5,000 निवेश करने हैं। अब सवाल है, इसे लार्ज कैप में लगाएं, मिड कैप में या स्मॉल कैप में? तीनों में फर्क है। तीनों का जोखिम अलग है। इसलिए सिर्फ यह देखकर फैसला न करें कि किसने पिछले साल ज्यादा रिटर्न दिया। क्योंकि SIP शॉर्ट टर्म के लिए करना सही नहीं होता। इसमें आपको ज्यादा से ज्यादा वक्त देना होता है।
तीनों में फर्क क्या है?
SEBI की कैटेगरी के हिसाब से लार्ज कैप में मार्केट कैप के हिसाब से देश की टॉप 100 कंपनियां आती हैं। 101वीं से 250वीं कंपनी मिड कैप में आती है। इसके बाद की कंपनियां स्मॉल कैप में आती हैं।
कैटेगरी
कंपनियों का आकार
जोखिम
किसके लिए ठीक
Large Cap
सबसे बड़ी कंपनियां
तुलनात्मक रूप से कम
नए और कम जोखिम चाहने वाले निवेशक
Mid Cap
मध्यम आकार की कंपनियां
ज्यादा
लंबी अवधि वाले निवेशक
Small Cap
छोटी कंपनियां
सबसे ज्यादा
ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक
यहां एक और बात समझना जरूरी है। लार्ज कैप का मतलब सुरक्षित निवेश नहीं है। शेयर बाजार में गिरावट आएगी तो लार्ज कैप भी गिरेगा। बस मिड कैप और स्मॉल कैप के मुकाबले उतार-चढ़ाव आम तौर पर कम रहने की उम्मीद होती है।
अगर पहली बार SIP शुरू कर रहे हैं
अगर आप पहली बार इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहे हैं, तो लार्ज कैप से शुरुआत करना आसान हो सकता है। बड़ी कंपनियों का कारोबार आम तौर पर ज्यादा स्थिर होता है। इनके पास लंबे समय का ट्रैक रिकॉर्ड भी होता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यहां रिटर्न कम ही मिलेगा। लंबे समय में बड़ी कंपनियां भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। बस आपको बहुत तेज उतार-चढ़ाव देखने को शायद कम मिले।
मान लीजिए बाजार अचानक 15-20% गिर गया। यह गिरावट स्मॉल कैप में ज्यादा नजर आ सकती है। हो सकता है कि उसके मुकाबले लार्ज कैप में कम गिरावट दिखे।
10-15 साल का समय है तो Mid Cap
अब मान लीजिए आपकी उम्र 25-35 साल है। कमाई नियमित है। अगले 10-15 साल तक बचत के पैसे की जरूरत नहीं है। बाजार गिरने पर SIP बंद करने का इरादा भी नहीं है। ऐसी स्थिति में मिड कैप आपके लिए बढ़िया हो सकता है।
मिड कैप साइज में कम होती हैं, लेकिन उनमें तेजी से आगे बढ़ने की गुंजाइश भी हो सकती है। यही वजह है कि इनमें जोखिम भी ज्यादा रहता है।
स्मॉल कैप में जोखिम समझ के पैसा लगाएं
स्मॉल कैप में छोटी कंपनियां होती हैं। इनमें तेजी से बढ़ने वाली कंपनियां मिल सकती हैं। लेकिन हर छोटी कंपनी बड़ी नहीं बनती। यही सबसे बड़ा जोखिम है।
बाजार अच्छा हो तो स्मॉल कैप फंड बहुत तेज भाग सकता है। लेकिन बाजार खराब होने पर गिरावट भी तेज हो सकती है। कई बार लंबे समय तक रिकवरी का इंतजार करना पड़ सकता है।
इसलिए स्मॉल कैप में वही पैसा लगाना बेहतर है जिसकी आपको जल्दी जरूरत नहीं है। अगर पांच साल बाद घर खरीदना है और उसी पैसे की जरूरत पड़ेगी, तो स्मॉल कैप पर बड़ा दांव लगाना समझदारी नहीं होगी।
₹5,000 की SIP कैसे बांट सकते हैं?
अगर आप तीनों कैटेगरी में थोड़ा-थोड़ा निवेश करना चाहते हैं, तो एक आसान तरीका यह हो सकता है।
फंड कैटेगरी
हर महीने निवेश
सालाना निवेश
Large Cap
₹2,500
₹30,000
Mid Cap
₹1,500
₹18,000
Small Cap
₹1,000
₹12,000
कुल
₹5,000
₹60,000
यह कोई तय फॉर्मूला नहीं है। इसे आपकी उम्र और जोखिम के हिसाब से बदला जा सकता है। अगर आप ज्यादा जोखिम ले सकते हैं, तो मिड कैप और स्मॉल कैप का हिस्सा बढ़ सकता है। अगर उतार-चढ़ाव पसंद नहीं है, तो लार्ज कैप का हिस्सा ज्यादा रखना बेहतर हो सकता है।
रिटर्न कितना मिलेगा
अगर पिछले 15 साल के औसत सालाना रिटर्न को सिर्फ उदाहरण मानें, तो FundsIndia Research के मुताबिक, लार्ज कैप ने करीब 11.9%, मिड कैप ने 17.2% और स्मॉल कैप ने करीब 14.7% सालाना रिटर्न दिया है।
इस हिसाब से ₹2,500 लार्ज कैप, ₹1,500 मिड कैप और ₹1,000 स्मॉल कैप में हर महीने लगाने पर 15 साल में आपका कुल निवेश ₹9 लाख होगा। ऐतिहासिक रिटर्न को आधार मानें तो यह रकम करीब ₹28.7 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹19.7 लाख का फायदा।
तीन फंड लेना जरूरी नहीं
यह भी जरूरी नहीं है कि ₹5,000 को तीन अलग-अलग फंड में बांटें। अगर आपको खुद तय नहीं करना कि कब Large Cap ज्यादा रखना है और कब Small Cap, तो Flexi Cap Fund एक विकल्प हो सकता है। ऐसे फंड को Large Cap, Mid Cap और Small Cap में निवेश करने की आजादी होती है।
यानी आपको हर कैटेगरी के लिए अलग फंड चुनने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यहां भी फंड का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। सिर्फ इसलिए कोई फंड मत खरीदिए कि उसने पिछले साल शानदार रिटर्न दिया था।
SIP में सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
बाजार गिरते ही SIP बंद कर देना। मान लीजिए आपने ₹5,000 की SIP शुरू की। बाजार गिर गया। आपने डरकर निवेश बंद कर दिया। फिर बाजार चढ़ गया।
इससे आपका नुकसान बढ़ सकता है। क्योंकि गिरते बाजार में आपको उसी ₹5,000 में ज्यादा यूनिट मिल रही थीं। SIP का फायदा ही यही है कि आप हर महीने निवेश करते रहते हैं। बाजार ऊपर हो या नीचे।
पिछले रिटर्न के पीछे मत भागिए
किसी फंड ने पिछले साल 30% रिटर्न दिया है। इसका मतलब यह नहीं कि अगले साल भी 30% मिलेगा। इसी तरह किसी फंड का एक साल खराब रहा है तो यह जरूरी नहीं कि वह हमेशा खराब ही रहेगा।
फंड चुनते समय सिर्फ रिटर्न मत देखिए। उसका पोर्टफोलियो देखिए। Expense Ratio देखिए। फंड कितना पुराना है, यह देखिए। फंड मैनेजर का रिकॉर्ड भी देख सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।