Direct Vs Regular Mutual Funds: एक ही स्कीम में ₹13 लाख का फर्क! समझिए कहां पैसा लगाना है आपके लिए फायदेमंद
Regular vs Direct Mutual Fund Difference: क्या आप जानते हैं कि एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम में सिर्फ 'Direct' की जगह 'Regular' चुनने पर आपको 13 लाख रुपए तक का भारी नुकसान हो सकता है। दोनों प्लान्स में फंड मैनेजर से लेकर शेयर्स तक सब एक होते हैं, फिर भी रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर क्यों आता है?
इन दोनों प्लान्स में फंड मैनेजर से लेकर शेयर्स तक सब एक होते हैं
Direct Vs Regular Mutual Funds: अगर आप म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करते हैं या एकमुश्त पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, तो आपने 'Direct Plan' और 'Regular Plan' का विकल्प जरूर देखा होगा। पहली नजर में दोनों एक ही स्कीम का हिस्सा लगते हैं। दोनों का फंड मैनेजर एक होता है, पोर्टफोलियो में शामिल शेयर भी वही होते हैं। लेकिन जब बात लॉन्ग टर्म रिटर्न की आती है, तो इन दोनों के बीच लाखों रुपए का अंतर पैदा हो जाता है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि रेगुलर और डायरेक्ट म्यूचुअल फंड में क्या अंतर होता है, 1% की बचत से आपकी वेल्थ पर क्या असर पड़ता है और आपको किस ऑप्शन में पैसा लगाना चाहिए।
क्या होता है रेगुलर म्यूचुअल फंड?
रेगुलर म्यूचुअल फंड वह प्लान होता है जिसे आप किसी मध्यस्थ जैसे- म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर, बैंक, एजेंट या फाइनेंशियल एडवाइजर के जरिए खरीदते हैं। इस प्लान में एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) आपके निवेश पर डिस्ट्रीब्यूटर को हर साल एक निश्चित कमीशन देती है। यह कमीशन अलग से नहीं लिया जाता, बल्कि फंड के एक्सपेंस रेशियो में जुड़ जाता है। इस वजह से रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो डायरेक्ट प्लान के मुकाबले हमेशा ज्यादा होता है।
क्या होता है डायरेक्ट म्यूचुअल फंड ?
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड वह प्लान होता है जिसे आप बिना किसी एजेंट या ब्रोकर के सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की वेबसाइट या रजिस्टर्ड डायरेक्ट प्लेटफॉर्म्स से खरीदते हैं। इसमें कोई मध्यस्थ नहीं होता, इसलिए AMC को किसी एजेंट को कमीशन नहीं देना पड़ता।
कमीशन न होने की वजह से डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है। जो पैसा कमीशन में बचता है, वही आपकी एनएवी (NAV) को बढ़ाता है और आपको ज्यादा कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।
रेगुलर और डायरेक्ट म्यूचुअल फंड में ये है प्रमुख अंतर
1% के फर्क से कैसे बनता है ₹13 लाख का अंतर?
अक्सर निवेशक सोचते हैं कि 0.5% या 1% के एक्सपेंस रेशियो से क्या ही फर्क पड़ेगा। इसे एक साधारण उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप ₹10,000 महीने की SIP 20 सालों के लिए करते हैं और फंड का औसत सालाना रिटर्न 12% रहता है:
रेगुलर फंड (1.5% एक्सपेंस रेशियो): आपका प्रभावी रिटर्न लगभग 10.5% रहेगा। 20 साल बाद आपका कुल कॉर्पस ~₹75 लाख बनेगा।
डायरेक्ट फंड (0.5% एक्सपेंस रेशियो): आपका प्रभावी रिटर्न 11.5% रहेगा। 20 साल बाद आपका कुल कॉर्पस ~₹88 लाख बनेगा।
यानी बिना कोई एक्स्ट्रा रिस्क लिए, केवल डायरेक्ट प्लान चुनने से आपको ₹13 लाख से ज्यादा का अतिरिक्त मुनाफा मिल सकता है।
किसमें करें निवेश: डायरेक्ट या रेगुलर?
आपको Direct Plan चुनना चाहिए: अगर आपको म्यूचुअल फंड और मार्केट के उतार-चढ़ाव की बुनियादी समझ है। आप खुद रिसर्च करके सही स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। साथ ही आप ऑनलाइन ऐप्स या AMC पोर्टल्स के जरिए खुद पोर्टफोलियो मैनेज करने में सहज हैं।
आपको Regular Plan चुनना चाहिए अगर: आप मार्केट में नए हैं और आपको समझ नहीं आ रहा कि कौन-सा फंड चुनें। आपके पास पोर्टफोलियो रिव्यू और रीबैलेंसिंग का समय नहीं है। आप किसी सर्टिफाइड डिस्ट्रीब्यूटर की व्यक्तिगत सलाह के बदले थोड़ा कमीशन देने को तैयार हैं।
अगर आप खुद वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम हैं, तो डायरेक्ट म्यूचुअल फंड ही आपकी वेल्थ क्रिएशन के लिए सबसे सही विकल्प है। यह आपके पैसे पर लगने वाली लागत को घटाकर कंपाउंडिंग के जादुई फायदे को बढ़ाता है। हालांकि, अगर आपको किसी एक्सपर्ट की लगातार गाइडेंस चाहिए, तो गलत फंड चुनकर नुकसान उठाने से बेहतर है कि आप रेगुलर फंड के रास्ते जाएं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।