8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकों की श्रृंखला में अगला सबसे बड़ा पड़ाव बेंगलुरु है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के दो दिवसीय दौरे पर रहेगी। बैठक में भाग लेने और अपनी मांगें रखने के लिए कर्मचारी संघों, एसोसिएशनों और पेंशनभोगी संगठनों को अधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 18 सितंबर तक आवेदन करने का समय दिया गया था। आयोग इस बैठक में प्रतिनिधिमंडलों और हितधारकों के साथ आमने-सामने की विस्तृत चर्चा करने जा रहा है।
किन-किन बड़ी बातों पर होगी चर्चा?
बेंगलुरु बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य फोकस इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा:
वेतन और फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान के तहत बेसिक पे का निर्धारण करने वाले फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम सहमति बनाना।
पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन, कम्यूटेशन अवधि घटाने और फैमिली पेंशन के नियमों को आसान बनाने पर मंथन।
भत्ते: बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते और महंगे शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोतरी पर चर्चा।
वार्षिक वेतन वृद्धि: मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि दर की समीक्षा और इसे बढ़ाने की मांग।
कार्य परिस्थितियां व पदोन्नति: कैडर पुनर्गठन और समयबद्ध पदोन्नति से जुड़े स्थानीय मुद्दे।
कर्मचारी यूनियंस की मुख्य मांगें
कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी जा रही प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करना: कर्मचारी संघों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाए।
2. 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग: बेसिक पे के रिवीजन के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
3. 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला: न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कर्मचारी और परिवार के साथ आश्रित माता-पिता को भी शामिल करते हुए '5-यूनिट फॉर्मूला' लागू करने की मांग।
4. वार्षिक इंक्रीमेंट 6% हो: सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की जा रही है।
5. कम्यूटेड पेंशन रीस्टोरेशन: कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव।
ये सभी आंकड़े और शर्तें फिलहाल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखी गई मांगें हैं। आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई सैलरी और पेंशन की दरें तय होंगी।