8th Pay Commission: दिल्ली में खत्म हुईं बैठकें, कर्मचारियों की मांग कम से कम ₹52,600 हो बेसिक सैलरी! समझिए फिटमेंट फैक्टर का गणित

8th Pay Commission Delhi Meeting: दिल्ली की बैठकें पूरी होने के बाद भी 8वें वेतन आयोग का कंसल्टेशन प्रोसेस जारी रहेगा। आयोग 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जयपुर का दौरा करेगा। इसके बाद 7-8 सितंबर को चेन्नई, 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16-18 सितंबर के दौरान चंडीगढ़ में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें होंगी

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 9:31 AM
IRTSA ने न्यूनतम सैलरी की गणना के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है

8th Pay Commission Latest News Today: 8वें वेतन आयोग की दिल्ली में जारी अहम परामर्श बैठकें आज यानी 10 अगस्त को समाप्त हो जाएगी। इन बैठकों में दिल्ली और आसपास के पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और एसोसिएशनों ने अपनी-अपनी मांगें आयोग के समक्ष रखने का मौका मिला।

इससे पहले नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) जैसी कई प्रमुख यूनियनें भी सैलरी, पेंशन और भत्तों में संशोधन को लेकर अपने ज्ञापन सौंप चुकी हैं। वेतन आयोग इन सभी सुझावों और मांगों का अध्ययन करने के बाद मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप सकता है।

इस बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने भी आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹52,600 प्रति माह करने और अलग-अलग पे-लेवल के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर तय करने की जोरदार मांग की गई है।


न्यूनतम सैलरी ₹52,600 और फिटमेंट फैक्टर की मांग

IRTSA ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाली न्यूनतम सैलरी ₹18,000 को बढ़ाकर सीधा ₹52,600 किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने न्यूनतम सैलरी की गणना के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है।

IRTSA का कहना है कि आज के आधुनिक पारिवारिक खर्चों जैसे- इंटरनेट का खर्च, पैकेज्ड पीने का पानी, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल इंश्योरेंस को ध्यान में रखते हुए पुरानी गणना का तरीका बदला जाना चाहिए।

साथ ही रेलवे सुरक्षा और तकनीकी श्रेणियों में तैनात कर्मचारियों के लिए पे-लेवल 6 से आगे अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है।

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

एसोसिएशन ने सभी पे-लेवल के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर रखने के बजाय कर्मचारियों के पद और जिम्मेदारी के हिसाब से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है:

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

(नोट: यह आंकड़े IRTSA द्वारा आयोग को दिए गए ज्ञापन पर आधारित हैं। अंतिम फैसला सरकार द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट के बाद ही होगा।)

5% सालाना इंक्रीमेंट और करियर ग्रोथ की मांग

IRTSA ने केवल सैलरी बढ़ाने की मांग नहीं की है, बल्कि कर्मचारियों के करियर और भत्तों में भी सुधार की सिफारिश की है:

5% एनुअल इंक्रीमेंट: वर्तमान में मिलने वाले 3% के सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया गया है।

ग्रुप-B गजेटेड का दर्जा: जूनियर इंजीनियर्स (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर्स (SSE) के करियर में आ रहे ठहराव को दूर करने के लिए SSE को ग्रुप B गजेटेड स्टेटस देने की मांग की गई है।

MACP और भत्तों में संशोधन: मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACPS) के नियमों में ढील देने के साथ-साथ नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम, रिस्क और हार्डशिप अलाउंस को आज के महंगाई दर के हिसाब से बढ़ाने की मांग रखी गई है।

आगे क्या होगा? जानिए वेतन आयोग का अगला शेड्यूल

दिल्ली की बैठकें पूरी होने के बाद भी 8वें वेतन आयोग का कंसल्टेशन प्रोसेस जारी रहेगा। आयोग 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जयपुर का दौरा करेगा। इसके बाद 7-8 सितंबर को चेन्नई, 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16-18 सितंबर के दौरान चंडीगढ़ में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें होंगी।

कुल मिलाकर फिलहाल न्यूनतम सैलरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। देशभर के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का ड्राफ्ट तैयार करेगा।

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