8th Pay Commission से पेंशनर्स की लग सकती है लॉटरी! ₹45,000 न्यूनतम पेंशन और OPS बहाली की उठी मांग
8th Pay Commission OPS vs NPS: देश में जबसे 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ है तभी से सरकारी कर्मचारियों में सैलरी और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। कोई फिटमेंट फैक्टर की बात करता है तो कोई भत्तों की। संगठनों ने पेंशन सुधारों को लेकर बड़ा मोर्चा खोल दिया है। NPS और UPS के बाजार-आधारित अनिश्चित रिटर्न से नाराज यूनियनों ने OPS की बहाली, न्यूनतम ₹45,000 पेंशन और अंतिम वेतन के 50% गारंटीड पेंशन की मांग रखी है। जानिए ये 4 प्रमुख मांगे
केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर 'गारंटीड पेंशन' और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं
8th Pay Commission OPS vs NPS Demand: देश में जबसे 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ है तभी से सरकारी कर्मचारियों में सैलरी और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। कोई फिटमेंट फैक्टर की बात करता है तो कोई भत्तों की। वही रिटायर हो चुके कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना और नेशनल पेंशन सिस्टम को लेकर बहस होती है।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है। देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ में हुई बैठकों के बाद अब 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में केंद्रीय कर्मचारियों की मांगें सुनी जाएंगी।
आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त दिया गया है, जिसके अनुसार रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपी जा सकती है। बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा सबसे गर्मा-गर्मी वाला विषय पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का बना हुआ है। साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब 'गारंटीड पेंशन' की मांग पर अड़ गए हैं।
क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना 'OPS vs NPS'?
वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।
कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी 'परिभाषित लाभ' वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।
प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?
अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:
A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।
B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।
C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।
D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।
आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें
वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।
आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।
8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर 'गारंटीड पेंशन' और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।