8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से चपरासी से लेकर टीचर तक सब होंगे मालामाल! जानें क्या-क्या है डिमांड और कब से लागू होगा नया नियम

8th Pay Commission Update: यूनियनों ने चपरासी से लेकर बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी की मांग की है। आसान भाषा में समझिए कि अगर ये मांगें मानी गईं, तो आपकी सैलरी का पूरा गणित कैसे बदल जाएगा

अपडेटेड May 25, 2026 पर 9:12 AM
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महंगाई को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की मांग की है

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बहुत बड़ी खबर आ रही है। वेतन आयोग ने पिछले महीने ही सभी यूनियनों और हितधारकों से सुझाव और मेमोरेंडम मांगे थे। इसके बाद देश के तीन सबसे बड़े कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी विस्तृत मांगें सौंप दी हैं।

इन संगठनों में नेशनल काउंसिल (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन शामिल हैं। इन यूनियनों ने चपरासी से लेकर बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी की मांग की है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अगर ये मांगें मानी गईं, तो आपकी सैलरी का पूरा गणित कैसे बदल जाएगा।

₹18000 से बढ़कर सीधे ₹69000 हो मिनिमम बेसिक सैलरी


फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18000 है। लेकिन महंगाई को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने इसमें रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी की मांग की है:

NC-JCM की मांग: न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर सीधे ₹69000 किया जाए।

डिफेंस सिविलियंस(AIDEF) की मांग: न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹69000 तय किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन की मांग: इसे कम से कम ₹65000 किया जाए।

चपरासी और लोअर स्टाफ को बंपर फायदा

अगर सरकार ₹69000 की इस मांग को मान लेती है, तो पे-मैट्रिक्स के सबसे निचले स्तर जैसे- चपरासी, मल्टी-टास्किंग स्टाफ यानी MTS पर भर्ती होने वाले नए कर्मचारी की शुरुआती इन-हैंड सैलरी ही भत्ते मिलाकर करीब ₹85000 से ₹90000 प्रति महीना हो जाएगी।

सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव

कर्मचारियों की सैलरी हर साल एक निश्चित दर से बढ़ती है, जिसे एनुअल इंक्रीमेंट कहते हैं। अभी यह दर 3% है, लेकिन यूनियनों ने इसे भी दोगुना करने की मांग की है।

NC-JCM ने सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर सीधे 6% करने की मांग रखी है।महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन ने इसे 5% करने का सुझाव दिया है। अगर सालाना इंक्रीमेंट 6% हो जाता है, तो हर साल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में होने वाला इजाफा पहले के मुकाबले दोगुना हो जाएगा, जिससे सीनियर कर्मचारियों और टीचर्स की सैलरी में भारी उछाल आएगा।

भत्तों पर भी बड़ा दांव

संगठनों ने केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि हाथ में आने वाले भत्तों को लेकर भी बड़े बदलावों की पैरवी की है:

रिस्क अलाउंस: डिफेंस और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए AIDEF ने ₹10000 से ₹15000 प्रति माह रिस्क अलाउंस देने की मांग की है।

मकान किराया भत्ता और ट्रैवल अलाउंस: महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन ने होम रेंट अलाउंस(HRA) को बढ़ाने और ट्रैवल अलाउंस(TA) को 2.5 गुना तक करने की मांग की है।

महंगाई भत्ता: यूनियनों का कहना है कि जब महंगाई भत्ता (DA) 50% पर पहुंचे, तो उसे तुरंत बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाए और न्यूनतम 4% की बढ़ोतरी हमेशा सुनिश्चित की जाए.

पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर

इस आयोग के फैसले से देश के करीब 65 लाख पेंशनभोगी भी प्रभावित होंगे। यूनियनों ने मांग की है कि:

OPS की वापसी: महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने और यूनिफाइड पेंशन स्कीम में बड़े सुधारों की मांग की है।

पेंशन पैरिटी: नई सैलरी स्ट्रक्चर के हिसाब से पुराने पेंशनर्स की पेंशन में भी उसी अनुपात में सुधार किया जाए ताकि रिटायर कर्मचारियों को नुकसान न हो।

कब तक लागू हो सकती हैं 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

8वें वेतन आयोग का गठन 17 जनवरी 2025 को किया गया था। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह पैनल फिलहाल डेटा का विश्लेषण कर रहा है। आयोग द्वारा मध्य 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने की उम्मीद है।

पुराने वेतन आयोगों का रिकॉर्ड देखें तो सिफारिशें लागू होने में समय लगता है। 7वें वेतन आयोग को लागू होने में ढाई साल, छठे को दो साल और 5वें वेतन आयोग को लागू होने में साढ़े तीन साल का समय लगा था। इसलिए कर्मचारियों को अंतिम सैलरी हाइक के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

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