8th Pay Commission: रेलवे कर्मचारियों की सैलरी होगी दोगुनी! फिटमेंट फैक्टर 3.80 करने पर अड़े यूनियन, देखें सभी बड़ी मांगें

8th Pay Commission Update: IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के पैनल के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹52600 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 तक ले जाने की मांग की है। अगर सरकार इन मांगों को स्वीकार कर लेती है, तो रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगा।

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 1:49 PM
हैदराबाद में 8वें वेतन आयोग के साथ रेलवे कर्मचारी संगठन की एक आधिकारिक बैठक हुई

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन और चर्चाओं के बीच भारतीय रेलवे के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रेलवे के एक प्रमुख कर्मचारी संगठन ने सरकार के सामने वेतन में भारी बढ़ोतरी और प्रमोशन से जुड़ी कई प्रमुख मांगें रख दी हैं।

'इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन' (IRTSA) ने 8वें वेतन आयोग के पैनल के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹52600 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 तक ले जाने की मांग की है। अगर सरकार इन मांगों को स्वीकार कर लेती है, तो रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगा।

हैदराबाद की बैठक में सौंपा गया मेमोरेंडम


पिछले महीने हैदराबाद में 8वें वेतन आयोग के साथ रेलवे कर्मचारी संगठन (IRTSA) की एक आधिकारिक बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी के. वी. रमेश ने पैनल के सामने एक विस्तृत और व्यापक ज्ञापन सौंपा। इस प्रेजेंटेशन में मुख्य रूप से टेक्निकल सुपरवाइजर्स, जूनियर इंजीनियरों (JEs) और सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSEs) की समस्याओं और उनके वेतन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

क्या हैं मुख्य मांगें?

एसोसिएशन ने आयोग के सामने रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों के करियर में आ रहे गतिरोध और वेतन विसंगतियों को रेखांकित किया और नीचे दी गईं प्रमुख मांगें सामने रखीं:

  • महंगाई को ध्यान में रखते हुए बेसिक मिनिमम पे को बढ़ाकर ₹52600 करने की मांग की गई है.
  • लेवल 1 के पदों के लिए फिटमेंट फैक्टर 2.92 तय करने की बात कही गई है।
  • सेफ्टी कैटेगरी और लेवल 6, 7 व 8 के पदों के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.50 करने की मांग है।
  • मध्य स्तर के पदों (पे लेवल 9 से 12) के लिए इसे 3.80 करने की वकालत की गई है।
  • सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSEs) को 'ग्रूप-बी राजपत्रित' का स्टेटस देने की मांग की गई है।
  • जूनियर इंजीनियर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर के काम की जिम्मेदारी और जोखिम भरे स्वभाव को देखते हुए उनके पे लेवल को अपग्रेड किया जाए।
  • रेलवे बोर्ड के मानदंडों के आधार पर ओपन लाइन इंजीनियरों और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए ग्रुप इंसेंटिव स्कीम शुरू की जाए।

रेलवे के टेक्निकल स्टाफ की क्या हैं मुख्य परेशानियां?

IRTSA के जनरल सेक्रेटरी के. वी. रमेश ने आयोग को बताया कि वर्तमान व्यवस्था के कारण टेक्निकल स्टाफ को कई तरह के नुकसान और विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्य रूप से इन दिक्कतों को सामने रखा:

प्रमोशन में रुकावट: ग्रेजुएट इंजीनियर जो सीधे SSE ग्रेड में भर्ती होते हैं, वे लंबे समय तक अपने एंट्री ग्रेड में ही फंसे रह जाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते।

ग्रुप-बी पदों की कमी: रेलवे के तकनीकी विभागों में ग्रुप-ए, बी और सी के पदों के वितरण में भारी विसंगति है, जिसके कारण ग्रुप-बी के पद बेहद कम हैं और प्रमोशन के रास्ते बंद हो जाते हैं।

ट्रेनिंग पीरियड और MACPS: एमएसीपी योजना के लाभ के लिए कर्मचारियों के ट्रेनिंग पीरियड को भी सेवा अवधि में शामिल किया जाए। साथ ही, अदालती फैसलों के अनुसार MACPS को 01.01.2006 से लागू करने की मांग की गई है।

भत्तों पर कैंची: पे लेवल-8 में आने वाले सीनियर सेक्शन इंजीनियरों के लिए पीसीओ अलाउंस को वापस ले लिया गया है, जिसे दोबारा बहाल करने की मांग की गई है। इसके अलावा नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम अलाउंस, रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस और एक्सीडेंट-फ्री सर्विस अवार्ड को ओपन लाइन इंजीनियरों तक बढ़ाने की मांग की गई है।

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